बेटी पढ़ाओ नहीं धरातल पर कॉलेज हैं अध्यापक नहीं देनी पड़ती है फीस
बेटी पढ़ाओ नहीं धरातल पर कॉलेज हैं अध्यापक नहीं देनी पड़ती है फीस

 

मुरादनगर। सरकार एक तरफ तो बालिका शिक्षा के लिए अनेक प्रयत्न कर रही है लेकिन सरकारी मशीनरी उसको पलीता लगाने में लगी हुई है। बालिका शिक्षा के नाम पर कॉलेज है मगर पूरा शिक्षण न होने के कारण बच्चियों के अभिभावकों को अभी भी शिक्षा के नाम पर मोटा पैसा खर्च करना पड़ रहा है। ऐसे में सवाल यह है कि गरीब की बेटी कैसे पड़ेगी और कैसे बढ़ेगी।


मुरादनगर के आयुध निर्माणी क्षेत्र में आसपास का इकलौता कन्या इंटर कॉलेज "जवाहरलाल स्मारक कन्या इंटर कॉलेज" में बच्चों से सरकार के सभी नियम कायदे को ताक पर रखकर फीस वसूल की जा रही है और फीस भी इस नाम पर जिसे देने से कोई अभिभावक इनकार करने की स्थिति में नहीं है। नियमानुसार कक्षा 8 तक किसी छात्र से फीस नहीं वसूली जा सकती लेकिन यहां छात्राओं से जमकर वसूली हो रही है। वह भी शिक्षक/अभिभावक संघ के नाम पर। इस स्कूल में आयुध निर्माणी क्षेत्र के अलावा मुरादनगर शहर व आसपास के आधा दर्जन से अधिक गांवों की बच्चियां भी शिक्षार्थ इस स्कूल के सहारे हैं। मुरादनगर क्षेत्र तेजी से शिक्षा के हब के रूप में बदलता जा रहा है। जहां देश के विभिन्न क्षेत्रों के अलावा विदेशों से भी शिक्षा ग्रहण करने मुरादनगर क्षेत्र का रूख कर रहे हैं। यह एक विडंबना ही है कि शिक्षा के नए आयाम कीर्तिमान करने वाले मुरादननगर क्षेत्र के नौनिहाल अभी तक संपूर्ण शिक्षा से वंचित हैं। इस स्कूल में बालिकाओं से वसूली जा रही फीस के नाम पर रकम को शिक्षक/अभिभावक संघ के नाम पर लिया जा रहा है।


इस विषय में कॉलेज की प्रधानाचार्य रेनू तोमर का कहना है कि सरकारी नियमानुसार फीस का प्रावधान नहीं है। लेकिन छात्र हित को देखते हुए यह फीस ली जा रही है। क्योंकि कॉलेज में समस्त विषयों के अध्यापक नहीं है और अध्यापक ना होने के कारण बच्चों का शिक्षण कार्य प्रभावित होता है। इसलिए स्कूल में संविदा के तौर पर विभिन्न विषयों के अध्यापक नियुक्त किए हुए हैं। जिनका वेतन आदि पेरेंट्स टीचर अभिभावक संघ के द्वारा किया जाता है। स्थाई नियुक्तियों पर उनके स्थान पर दूसरे अध्यापक नियुक्त नहीं होते हैं तब तक उन्हें रखना आवश्यक है। प्रधानाचार्य ने बताया कि स्कूल में एक बड़ा पुस्तकालय ना होने के कारण बच्चे ठीक से पढ़ नहीं पाते हैं स्कूल में 1200 बच्चे पढ़ते हैं जिनके लिए एक बड़े पुस्तकालय की आवश्यकता भी है। जिससे छात्राएं आसानी से पुस्तकें पढ़ सके और उनको सभी पुस्तकें उपलब्ध हो।

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