सीमान्त गाँधी, भारत रत्न अब्दुल गनी गफ्फार खान की पुण्यतिथि पर

सीमान्त गाँधी, भारत रत्न अब्दुल गनी गफ्फार खान की पुण्यतिथि पर


गांधीवादियों की पूरी जमात है। पूरी दुनिया में है और तब से है जब से गांधी हुए। लेकिन दूसरा गांधी एक ही हुआ, सरहदी गांधी। खान अब्दुल गफ्फार खान ने गांधीवाद को इस कदर आत्मसात किया कि लोग उन्हें गांधी ही कहने लगे।



इन महापुरुष के जीवन के सत्य से हम निम्नलिखित पक्तियों को पढ़कर रुबरू हो जाएंगे ऐसा महान व्यक्तित्व था सीमान्त गाँधी का......
गाड़ी दिल्ली पहुंची तो लगभग खाली थी। ज्यादा लोग नहीं उतरे। फिर भी महात्मा गांधी ने जिसे लाने भेजा था, वह कहीं नहीं दिखे। उनका भेजा आदमी हर डिब्बे में जा जाकर देखने लगा। एक खाली डिब्बे में एक सज्जन बैठे - बैठे सो रहे थे। खान अब्दुल गफ्फार खान को पहचानकर उस आदमी ने उठाया। खां साहब ने माफी मांगते हुए कहा कि लंबा सफर हुआ तो आंख लग गई। उस आदमी ने कहा कि आप लेट क्यों नहीं गए, गाड़ी तो खाली ही थी। खां साहब ने जवाब दिया, "वो मैं कैसे करता, मेरा टिकट स्लीपर का नहीं था ना।"
भारत से अलग होने की उनकी पीड़ा ,उनकी इन पक्तियों मे स्पष्ट हो जाती है। "हमे उन भूखे कुत्तों के सामने क्यों छोड़ दिया गया।"


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