उद्योगों के हितों के लिए और उसके बढ़ावे के लिए काम कर रही है मुरादनगर हैंडलूम पावरलूम एसोसिएशन
उद्योगों के हितों के लिए और उसके बढ़ावे के लिए काम कर रही है मुरादनगर हैंडलूम पावरलूम एसोसिएशन

 


 

मुरादनगर। "मुरादनगर हैंडलूम पावर लूम एसोसिएशन" है जो हैंडलूम पावर लूम के हितों के लिए कार्य कर रही है, जिसके संरक्षक चौधरी सतपाल हैं। यह संघ उस वक्त बना जब हाथ  की मशीन  हुआ करती थी। फिर पावर लूम वजूद में आई। उसके बाद ऑटोमेटिक लूम वजूद में आ गई जिसके आने से उद्योगों को काफी लाभ पहुंचा। इस संघ में उद्योगों के लिए 450 फैक्ट्रियां आती हैं। यह संघ उद्योगों में आई परेशानियों को देखता है। सतपाल चौधरी का कहना है कि पिछले सालों में बिजली का एक रेट फिक्स था 150 रुपए। लेकिन अब सरकार यह नियम बदलने को कह रही है। अगर नियम बदला तो पावर लूम उद्योगों को काफी नुकसान होगा और उद्योग घाटे में चला जाएगा। उद्योग धंधे चौपट हो जाएंगे। उनका कहना है कि छोटे उद्योग व्यापार ₹200 किलोवाट हो जाए, उससे बड़े उद्योग व्यापार ₹400 किलोवाट हो जाए और जो उससे भी बड़े व्यापार हैं वह ₹600 किलोवाट के रेट पर हो जाए तो बेहतर होगा। उससे सरकार का भी फायदा होगा और उद्योग धंधे भी चौपट ना हो पाएंगे। सतपाल चौधरी ने बताया कि हमने मुख्यमंत्री को एक पत्र भी लिखा है। जिसमें सरकार से बिजली रेट मीटर पर ना लाने की गुहार लगाई है। 

 

मुरादनगर कस्बे में लगभग 500 छोटी बड़ी इकाइयां पावरलूम पर सूती कपड़ा बनाने की लगी हुई है। यहां पर हजारों की संख्या में गरीब बुनकर पावर लूम पर सूती कपड़ा बनाकर अपने परिवारों का पालन पोषण कर रहे हैं। आर्थिक मंदी के चलते लघु उद्योग भयंकर मंदी के दौर से गुजर रहा है। यदि 2006 में प्रदेश सरकार द्वारा फ्लैट रेट पर बिजली नहीं दी गई होती तो अब तक यह पावरलूम इकाइयां पूर्णता बंद हो जाती। पावर लूम लघु उद्योग प्रदेश में कृषि के बाद सबसे अधिक रोजगार के अवसर प्रदान करता है। बुनकरों की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर होने के कारण उत्तर प्रदेश का पावरलूम उद्योग काफी पीछे रह गया है। वर्तमान फ्लैट रेट प्रति हॉर्स पावर लूम पर लिया जा रहा है। वह कम है तो इसमें हमारा सुझाव है कि सरकार फ्लैट रेट लागू कर दे

1 किलो वाट से 10 किलो वाट तक 

11 किलो 25 किलो वाट तक 

26 किलो वाट से 50 किलो वाट तक 

51 किलो वाट से 75 किलो वाट तक इससे विद्युत विभाग के अधिकारियों द्वारा शोषण भी नहीं होगा जिससे कि पावरलूम इकाइयां सुचारू रूप से चलती रहें।

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