जीवन कौशल शिक्षा प्रशिक्षण शिविर के तीसरे दिन किशोरावस्था को लेकर कार्यशाला

जीवन कौशल शिक्षा प्रशिक्षण शिविर के तीसरे दिन किशोरावस्था को लेकर कार्यशाला


मोदीनगर। सोमवार को मोदीनगर में भारत सरकार के नेहरू युवा केन्द्र संगठन के तत्वावधान में सात दिवसीय जीवन कौशल शिक्षा प्रशिक्षण के दूसरे दिन वक्ताओं ने किशोरों की जीवन शैली एवं आदतों में तेजी से हो रहे बदलाव को लेकर विचार रखे।



साथ ही किशोरों के जीवन में होने वाली बहुत सी उलझनों के बारे में विस्तार से बताया गया।
मोदीनगर स्थित सरस्वती विद्या मंदिर हायर सेकेंडरी स्कूल में संचालित जीवन कौशल शिक्षा प्रशिक्षण के दूसरे दिन सर्वधर्म प्रार्थना के बाद चेतना गीत के माध्यम से प्रशिक्षिका प्रभा शर्मा ने सत्र की शुरूआत की। इस दौरान उन्होंने प्रतिभागियों को छोटे—छोटे समूह में बांटते हुए जीवन कौशल को विस्तार पूर्वक समझाया। इस दौरान उन्होंने जीवन कौशल को लेकर किशोरों में होने वाले परिवर्तन एवं जिम्मेदारी निर्वाहन को बारिकी से प्रतिभागियों को बताया।



उन्होंने बताया कि जीवन कौशल, अनुकूली तथा सकारात्मक व्यवहार की वे योग्यताएँ हैं जो व्यक्तियों को दैनिक जीवन की माँगों और चुनौतियों से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए सक्षम बनाती हैं। ये जीवन कौशल सीखे जा सकते हैं तथा उनमें सुधार भी किया जा सकता है। जिसमें आग्रहिता, समय प्रबंधन, सविवेक चिंतन, संबंधों में सुथार, स्वयं की देखभाल के साथ-साथ ऐसी असहायक आदतों, जैसे – पूर्णतावादी होना, विलंबन या टालना इत्यादि से मुक्ति, कुछ ऐसे जीवन कौशल है जिनसे जीवन की चुनौतियों का सामना करने में मदद मिलेगी। इस दौरान नेहरू युवा मण्डल के पूर्व अध्यक्ष लुकमान चौहान ने जीवन कौशल के बारे में बताते हुए कहा कि हमें आग्रहिता व्यवहार सीखना चाहिये।



उन्होंने बताया कि आग्रहिता एक ऐसा व्यवहार या कौशल है जो हमारी भावनाओं, आवश्यकताओं, इच्छाओं तथा विचारों के सुस्पष्ट तथा विश्वासपूर्ण संप्रेपषण में साहयक होता है। यह ऐसी योग्यता है जिसके द्वारा किसी के निवेदन को अस्वीकार करना, किसी विषय पर बिना आत्मचेतन के अपने मत को अभिव्यक्त करना, या फिर खुल कर ऐसे संवेगो जैसै … प्रेम ‘ क्रोध इत्यादि को अभिव्यक्त करना संभव होता हैं। साथ ही उन्होंने चेतना गीत भी प्रस्तुत किया। जबकि नेहरू युवा केन्द्र गाजियाबाद के लेखाकर मुकन्द वल्लभ शर्मा ने कहा कि यदि आप आग्रही हैं तो आपमें उच्च आत्म-विश्वास एव्ं आत्म- सम्मान तथा अपनी अस्मिता की एक अटूट भावना होती है। दूसरे सत्र में प्रभा शर्मा ने प्रतिभागियों को छोटे—छोटे समूह में बांट कर किशोरावस्था में होने वाले परिवर्तनों को लेकर कहानी के माध्यम से अभ्यास कराया। जिसमें प्रतिभागियों ने अपनी किशोरी को समाज के डर से स्कूल नही भेजने वाले माता—पिता को बडे ही अच्छे ढंग से समझाया। इस मौके पर प्रधानाचार्य. श्री जगवीर शर्मा, अध्यापिका श्रीमती संगीता शर्मा एनवाईवी विकास, अजय कुमार, प्रशिक्षिका श्रीमती कोपल एवं संध्या उपस्थित रहे।


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