स्कूल फीस के लिए बना रहे हैं दबाव - असलम खान
स्कूल फीस के लिए बना रहे हैं दबाव - असलम खान

 


 

मुरादनगर। कोरोना महामारी लॉक डाउन  सरकार के निर्देश सभी को ताक पर रखकर  रावली रोड़ स्थित टीआरएम पब्लिक स्कूल फीस की वसूली के लिए अभिभावकों पर अध्यापकों के द्वारा बना रहा है। कोरोना के विश्वव्यापी प्रकोप को देखते हुए प्रदेश देश व अनेक देशों में सभी काम धंधे बंद है। सरकार सख्ती के साथ लॉक डाउन का पालन करा रही है वही देशवासियों को हर तरह की मदद उपलब्ध कराने के साथ ही सरकार ने बंदी के दिनों की स्कूलों द्वारा फीस वसूली पर पाबंदी लगा दी गई है।

स्कूल संचालक अभिभावकों से पैसा लेने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। फीस के लिए बच्चों से न कहकर बच्चों के घरों पर स्कूलों के अध्यापक पहुंच रहे हैं और अभिभावकों से फीस जमा करने के लिए दबाव बना रहे हैं। जो अभिभावक सरकार द्वारा फीस ने दिए जाने की बात कहता है तो उसे बच्चे के भविष्य को लेकर तरह तरह से डराया जाता है। अब कहा जा रहा है कि लॉक डाउन तक सरकार की चल रही है। उसके बाद जैसा स्कूल संचालक चाहेंगे वैसा ही होगा। फीस हर हाल में देनी पड़ेगी वह चाहे अब दे दें या लॉक डाउन खुलने के बाद पेनल्टी के साथ देनी पड़ेगी।

इस बारे में राष्ट्रीय लोक दल के प्रदेश महासचिव असलम खान ने जिला अधिकारी को पत्र लिखकर स्कूल संचालकों को बंदी के दिनों में फीस न वसूलने के आदेश देने की मांग करते हुए बताया है कि रावली रोड़ पर स्थित तुलसीराम माहेश्वरी पब्लिक स्कूल के अध्यापक छात्र-छात्राओं के घरों पर पहुंचकर उनके अभिभावकों पर फीस जमा करने का दबाव बना रहे हैं। महामारी के कारण लोगों के काम धंधे बंद हैं। पेट भरने के लिए भी लोगों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। सरकार व समाजसेवी संस्थाएं लोगों के भोजन आदि का प्रबंध कर रही हैं। लोगों के पास राशन तक खरीदने के पैसे नहीं रहे हैं। ऐसे में स्कूल वाले बच्चों की फीस के लिए दबाव बनाकर एक तरह से धमकी भी दे रहे हैं कि फीस जमा नहीं की तो बच्चे के साथ कुछ भी हो सकता है और बच्चे का अभिभावक कभी नहीं चाहेगा कि उसका बच्चा फेल हो या स्कूल से नाम कटे और इसी चीज का फायदा उठाकर स्कूल प्रबंधन फीस वसूली कर रहा है जोकि शासन के निर्देशों का खुला उल्लंघन है। खान का कहना है कि स्कूल ग्रामीण क्षेत्र से लगा हुआ है। शहर के अलावा ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे भी स्कूल में पढ़ते हैं।

अधिकांश बच्चे मध्यम वर्गीय परिवारों से है और तालाबंदी से सबसे ज्यादा प्रभावित भी यही वर्ग है। लोकदल नेता का कहना है कि काम चलते पैसा आते समय परिजन किसी तरह से बच्चों की महंगी थी, जुटा पाते हैं। जब पूरे देश में लोगों में जान बचाने और पेट भरने के लिए हाहाकार मचा हुआ है। ऐसे में स्कूल वालों का व्यवहार अमानवीय है। पत्र की प्रतिलिपि विभागीय उच्चाधिकारियों व मुख्यमंत्री को भी प्रेषित की गई है।

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