बच्चों की फीस माफ की जाए भाजपा सरकार नहीं है गंभीर - चौधरी वीरेंद्र सिंह
बच्चों की फीस माफ की जाए भाजपा सरकार नहीं है गंभीर - चौधरी वीरेंद्र सिंह

 


 

मुरादनगर। उo प्रo कांग्रेस कमेटी के सदस्य चौo विरेन्द्र सिंह ने ब्यान जारी करते हुए कहा है कि लाॅक डाउन के दौरान छात्र/छात्राओं की  फीस माफी का मुद्दा पिछले कई दिनों से विभिन्न संगठनों द्वारा उठाया जा रहा है। मगर इस पर जिला-प्रशासन कोई गंभीरता नहीं दिखा रहा। लोक डाउन के दौरान सब लोग अपने घरों पर लॉक डाउन का पालन कर रहे हैं और सबके काम बन्द पड़े है।  एक तरफ तो सरकार ने भी दुकानदार और छोटी-बड़ी फैक्ट्री, संस्थान व प्रतिष्ठान मालिकों को अपने कर्मचारियों को वेतन अपने पास से देने के लिये कहा है तो दूसरी तरफ स्कूल प्रशासन लगातार अभिभावकों पर फीस जमा करने के लिए मैसेज और फोन के माध्यम से दबाव बना रहे हैं। परंतु इस मामले में स्थानीय सांसद और केंद्रीय मंत्री वी.के. सिंह, राज्यमंत्री अतुल गर्ग, राज्यसभा सांसद अनिल अग्रवाल और गाजियाबाद के विधायकों की कोई गंभीरता सामने नहीं आ रही है। क्योंकि आज जब केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकार है और स्कूल मालिक लगातार पेरेंट्स पर दबाव बना रहे हैं । एक तरफ जब स्कूल लॉक डाउन के दौरान बंद है स्कूल चलाने का कोई भी खर्चा उन्हें नहीं उठाना पड़ रहा है। केवल अध्यापक/अध्यापिकाओं की सैलरी ही उन्हे देनी है लेकिन फिर भी पूरी फीस की मांग अभिभवकों  से  की जा रही है। 

उन्होंने कहा कि अगर  सरकार चाहे तो 24 घंटे में पूरे प्रदेश के निजी स्कूलों की मनमानी रोक सकती है। परंतु सरकार और यहां बैठे केंद्र में मंत्री, राज्य मंत्री और विधायकों का इस पर कोई ध्यान नहीं है। बल्कि उल्टी दोहरी मानसिकता सामने आ रही है, केवल जनता को दिखाने के लिए वे कभी ट्विटर या लेटर के माध्यम से जनता को छलने का काम कर रहे है। यह बहुत गंभीर मुद्दा है जनता के हित में उनको तत्काल लॉकडाउन के दौरान की फीस माफी का आदेश सरकार द्वारा शासन के माध्यम से स्थानीय प्रशासन एवं विद्यालयों को भिजवाना चाहिए। साथ ही उन्होंने सभी अभिभावकों से स्कूल प्रशासन द्वारा फीस मांगने के बावजूद जमा न करने का आग्रह किया और कहा कि कांग्रेस पार्टी उनकी इस जायज मांग के साथ है।

चौo विरेन्द्र सिह ने कहा कि मैं सभी स्थानीय जनप्रतिनिधियों से अग्रह करता हूँ कि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर संकट की इस घड़ी में जनहित के इस मुद्दे का समर्थन करते हुए, अभिभावकों को फीस की फांस से राहत प्रदान करवाने में अपना योगदान दें।

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