भाजपा व्यापारी नेता ने कोरोना पर सरकार को घेरा
भाजपा व्यापारी नेता ने कोरोना पर सरकार को घेरा

 


 

मुरादनगर। उत्तर प्रदेश संयुक्त व्यापार मंडल गाजियाबाद के जिला व मुरादनगर भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष ने कोरोना पर रोकथाम में सरकार पर विफल रहने का आरोप लगाया है। ज्ञानेंद्र सिंघल ने जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में सवाल उठाया आखिर इस तरह लाॅकडाउन से कोरोना से पीछा कैसे छूटेगा। सिंघल ने कहा  प्रधानमंत्री ने 22 मार्च को संपूर्ण देश में लोक डाउन घोषित किया था। उस समय उत्तर प्रदेश में कोरोना के मात्र ग्यारह व संपूर्ण देश में मात्र 396 मरीज थे। 22 मार्च से घोषित लॉक डाउन अभी तक लगातार जारी है जिसे लगभग 48 दिन हो गए हैं। मरीजों की संख्या  अकेले उत्तर प्रदेश में लगभग लगभग ढाई हजार एक्टिव व संपूर्ण भारत में 40,000 से अधिक एक्टिव कोरोना मरीज हैं। 48 दिनों में 396 से लगभग 40,000 हुए कोरोना मरीजों की वृद्धि को सरकार कोई खास नहीं मान रही हैं। वह अपने मुंह मियां मिट्ठू बनकर सफलता के जश्न की ताली पीट रही है। मात्र 396 कोरोना मरीजों पर संपूर्ण देश में लॉक डाउन व 40,000 एक्टिव कोरोना मरीजों पर लाॅक डाउन में ढील, जबकि एम्स के निदेशक कह रहे हैं जून-जुलाई में भारत में होगी कोरोना मरीजों की बेतहाशा वृद्धि। 

सिंघल ने कहा वह एम्स के निदेशक की बात का समर्थन करते हैं जिस तरह का लॉक डाउन भारत में चल रहा है। उससे तो लगता है पूरा 2020 कोरोना की भेंट चढ़ जाए तो आश्चर्य नहीं होगा। सिंघल ने कहा भारत में ताला बंदी  मजाक बनकर रह गया है। बैंकों के बाहर जनधन खाता धारकों द्वारा ₹500 निकालने के लिए लंबी लंबी लाइन उसके बाद मुफ्त राशन प्राप्त करने वालों की राशन डीलरों के बाहर लंबी लंबी लाइन और इसके बाद तो हद ही हो गई, सरकार द्वारा शराब के ठेके खोल देने पर शराब पीकर मौज मस्ती करने वाले शराबियों की ठेकों के बाहर दो 2 किलोमीटर लंबी लाइन। समयानुसार खुलने वाले बाजारों में रोजाना भारी भीड़। सिंघल ने कहा ध्यान करने योग्य सबसे विशेष बात यह है बैंक, राशन डीलर, सब्जी मंडी हो या शराब के ठेकों के बाहर जो लंबी लंबी लाइन लगी उसमें सामाजिक दूरी का कोई ध्यान नहीं रखा गया। सिंघल ने कहा अगर पूरे साल भी इस तरह लाॅक डाउन का मजाक चलता रहा तो कैसे रुकेगी कोरोना मरीजों की रोजाना हो रही बेतहाशा वृद्धि।

उन्होंने कहा कोरोना महामारी की चेन तोड़ने का उनकी नजर में सिर्फ और सिर्फ एक उपाय है पूरे देश में 15-16 दिन का कर्फ्यू क्योंकि डॉक्टरों का कहना है 14 दिन में कोरोना संक्रमण की चेन टूट जाती है। अगर यह सही है तो लाॅक डाउन क्यों, कर्फ्यू क्यों नहीं? हम सभी ने बीते पिछले 48 दिनों में लोक डाउन के मजाक का रिजल्ट देखा है। भारत में बढ़ते भीड़तंत्र से सामाजिक दूरी बनाकर रहने की उम्मीद करना बेईमानी है। देश में आपातकाल के हालात हैं। एम्स निदेशक के अनुसार अगर भारत में यह महामारी फैलती चली गई तो गंभीर समस्या पैदा हो जाएगी, जिसकी भरपाई करना संभव नहीं होगा। इस महामारी से निजात पाने के लिए सरकार द्वारा संपूर्ण देश में 15-16 दिनों का कर्फ्यू घोषित करना चाहिए। कर्फ्यू का मतलब कर्फ्यू ही होना चाहिए। दवाई की दुकानों को छोड़कर सब्जी, दूध किराना, किसी को भी कोई छूट नहीं होनी चाहिए। मतलब सब कुछ बंद, देश में अभी इस्तेमाल में आने वाले राशन का स्टॉक है जिससे 20 दिन का समय आसानी से निकाला जा सकता है। इन 15-16 दिनों के दौरान अगर मोहल्ले में कोई भूखा परिवार भी है तो मानवता के नाते पड़ोसी का धर्म कर्तव्य बन जाता है कि कोई भूखा ना रहे जो इस बात का ध्यान धार्मिक, सामाजिक, लोगों द्वारा स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा अब भी रखा जा रहा है। यही हमारे देश की संस्कृति है। अगर वह कोरोना जैसी वैश्विक संक्रमण महामारी की चेन तोड़ने के लिए वाकई गंभीर है तो 15-16 दिनों का कर्फ्यू घोषित करें आपातकाल के इन हालातों में जनता को भी कर्फ्यू का पालन करके कोरोना को हराकर विजय प्राप्त करने में सरकार का सहयोग करना चाहिए तभी महामारी से निजात पाना संभव हो पाएगा।

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