मां को जीना कठिन - अनिला सिंह
मां को जीना कठिन - अनिला सिंह

 


 

मोदीनगर। विश्व मातृ दिवस किसी अवसर पर वरिष्ठ भाजपा नेत्री डॉ अनिला सिंह आर्य ने माताओं को बधाई देते हुए कहा कि प्रवचन करना, मंच से बहुत ही खूबसूरत शब्दों में किसी विषय पर व्यख्यान देना या किसी पात्र को अभिनय में जीना थोड़े अभ्यास के पश्चात सरल होता है। लेकिन उसे वास्तव में जब जीया जाता है तो सहज नहीं होता। उन्होंने कहा आज माँ पर अनेक भावपूर्ण संदेश आए ।सम्भवतः कल भी भरमार रहेगी। एक अक्षर में सम्पूर्ण ब्रम्हाण्ड समाया है। यह जब अपनी संतान के मुख से माँ सुनती बहुत सी बातें दुनिया की बदल गयीं। नहीं बदली तो मातृत्व की मिठास। कामकाजी माँ हो या ग्रहणी हो। छवि जरूर बदली है।अपने अस्तित्व ,व्यक्तित्व के प्रति जागरूक माँ है एक ओर तो दूसरी तरफ बच्चे के विकास की ओर से विमुख नहीं है।

 उन्होंने कहा एक जैसी प्रसव वेदना झेलने पर भी पुत्र को जन्म देने वाली माँ पुत्री को जन्म देने वाली माँ से श्रेष्ठ क्यों हो जाती है।

विश्व मातृदिवस पर यह भी मनन करने योग्य  है कहते हैं मातृ त्व प्राप्त माँ आज न जाने क्यों अपने शिशु को प्रकृति प्रदत्त दुग्ध का पान नहीं करा पाती। इसका उत्तर मौन ही होता है।लेकिन ममता के अहसास में तनिक भी अन्तर नहीं मिलता पूर्व से लेकर पश्चिम तक और उत्तर से लेकर दक्षिण तक। पशु पक्षियों में भी अपनी संतती के प्रति मातृ भाव परिलक्षित होता है। उनमें पालने का काम माँ ही करती है।

धरती पर भी जब सभ्यता विकसित नहीं थी विवाह परम्परा तथा परिवार की संस्था नहीं थी। तब माँ ही लालन पालन करती थी। आज पुनः समाज का दृश्य बदला है। पत्नी की मृत्यु पश्चात संतान को सम्भालना पिता केलिए असम्भव होता है। परन्तु विधवा होने पर माँ कमाने के साथ साथ अपने बच्चोंकी परवरिश भी कर लेती है। विधवा अकेले रह कर भी जिम्मेदारियों से मुँह नहीं मोड़ती वह त्यागमयी, स्नेहमयी माँ होती है।

माँ को विशेष सलाम है हमारा जिसके बच्चे दुनिया में कोई भी खास मकाम हासिल करते हैं। हर उस अम्मा को नमन जिसने अपने अक्स को आँचल में छुपा कर सुरक्षा दी और जमाने के खोखले रिवाजों से टकरा गयीं। बिना विवाह किए भी माँ अपने  बच्चों की  परवरिश  बाखूबी कर रही हैं। सामाज का सामना करना, धनोपार्जन करना और फिर संतान का लालन-पालन व शिक्षा-दीक्षा की व्यवस्था करना  सबको  कुशलता से  निभा रही है। वह उसका लाभ भी उठाना चहती है। लेकिन ऐसी महत्वाकांक्षी माताओं से निवेदन है कि अगर आप माँ बनीं हैं तो उसके बचपन कोअपनी देखरेख में बढ़ने दीजिए। वह आपसे आपकी जिन्दगी के चन्द साल मांगता है।

 

कमाने के लिए तमाम उम्र पड़ी है।

 

यूँ हीं नहीं माँ के कदमों तले जन्नत नहीं होती।

 

यूँ ही माँ दुनिया में ऊपर वाले की

 

सर्वश्रेष्ठ रचना नहीं होती।

 

माता को निर्माता यूँही नहीं कहते।

 

पूरी दुनिया में अनगिनत निर्माण कर ले पुरुष।परन्तु लाख जतन करके भी जन्म नहीं दे सकते नवजीवन को। यह विशेषतानारी को दी जिसकी पूरी कायनात ऋणी है। वर्तमान में एक दायित्व माँ की झोली में आ गया है वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से बचाव के लिए स्वयं व अपने नौनिहाल दिए दिशा निर्देश का पालन करें और करवाये।

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