शराब खरीदने वालों को  मिलने वाली मदद सरकार बंद करें 

शराब खरीदने वालों को  मिलने वाली मदद सरकार बंद करें 

 

आधार कार्ड से लिंक कर शराब बेची जाए - ज्ञानेंद्र सिंघल

 


 

मुरादनगर। व्यापारी त्रस्त डॉक्टर,नर्स,पुलिस प्रशासन पस्त,जनधन खाता धारक मस्त, व्यापारी डॉक्टर नर्स पुलिस प्रशासन के लिए कोरोना बना बिना आंसुओं के अंदर ही अंदर रोना। यह कहना है पश्चिम उत्तर प्रदेश संयुक्त व्यापार मंडल गाजियाबाद के जिलाध्यक्ष ज्ञानेंद्र सिंहल का। सिंघल ने जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कोरोना वैश्विक संक्रमण महामारी के चलते पिछले लगभग 45 दिनों से संपूर्ण देश में लॉक डाउन है। पुलिस प्रशासन डॉक्टर नर्स अपने परिवार छोटे-छोटे बच्चे माता पिता की परवाह किए बगैर दिन रात 24 घंटे उक्त महामारी के संक्रमण को न फैलने देने के लिए सेवा कार्य में लगे हैं। 95% व्यापारी अपना व्यापार बंद कर घरों में कैद है 5% व्यापारी जोकि रोजाना जरूरत की चीजें आटा किराना दूध मेडिकल स्टोर आदि का व्यापार करते हैं। कोरोना संक्रमण बीमारी का खतरा मोल लेते हुए आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति करने के सेवा कार्य में लगे हैं। विभिन्न सामाजिक संगठन जरूरतमंद असहाय लोगों को दोनों समय का भोजन या राशन वितरण का सेवा कार्य मे लगे हैं।

सरकार को भिन्न-भिन्न टैक्सों के रूप में जनता द्वारा दिए गए हजारों करोड़ रुपए जनधन खाताधारकों को गरीब जरूरतमंद, असहाय मानकर पेट की भूख शांत करने के लिए लॉक डाउन के दौरान दे दिए गए। वह पैसे अधिकांश जनधन खाता धारकों द्वारा शराब की मौज मस्ती में बहते नजर आ रहे हैं। क्योंकि शराब के लिए लगी दो-दो किलोमीटर लंबी लाइन में अधिकांशतः वही लोग हैं, जिन्हें सरकार ने मुफ्त में राशन, तीन महीने तक हर महीने पांच सो रुपए व लगातार तीन महीने तक गैस का फ्री सिलेंडर दिया है। यह सरकारी खजाने की बंदरबांट नहीं है तो और क्या है ? शराब की बिक्री को आधार कार्ड से लिंक करके यह जांच होनी चाहिए जिन जिन जनधन खाता धारकों को मुफ्त राशन ₹500 नगद, गैस सिलेंडर फ्री का लाभ दिया गया है, उनमें से किस-किस ने जनता द्वारा दिए गए टैक्स को शराब की मौज मस्ती में बहाया है। ऐसे जनधन खाता धारकों से पैसे की रिकवरी होकर उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए क्योंकि वह पैसा उन्हें पेट की भूख शांत करने के लिए रोजमर्रा की जरूरत पूरा करने के लिए दिया गया था ना कि शराब की मौज मस्ती के लिए। कोरोना वैश्विक संक्रमण महामारी की चेन तोड़ने के लिए 45 दिन से लगातार चल रहे लोक डाउन के दौरान अपने परिजनों बच्चों को नजरअंदाज करके पुलिस प्रशासन व डॉ नर्सों ने जो  पसीना बहाया गया, सरकार द्वारा शराब के ठेके खोलने के बाद शराब की मौज मस्ती वालों की दो 2 किलोमीटर लंबी लाइनों से अब तक की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है।

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