शिवराज सिंह सैनी की हुई रसम पगड़ी शोक सभा 

शिवराज सिंह सैनी की हुई रसम पगड़ी शोक सभा 



मुरादनगर। नगर पालिका परिषद वार्ड नंबर 6 सभासद शिवराज सिंह सैनी की रसम पगड़ी शोक सभा हुई। जिसमें गणमान्य लोगों ने पहुंचकर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। वहीं वार्ड वासियों के लिए भी यह ऐसा दिन रहा कि उनके बीच उनका चुना हुआ दुख दर्द में काम आने वाला शख्स उन्हें छोड़ गया। 


शिवराज सिंह सैनी को गोली मारने के आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है लेकिन यह हत्याकांड यह बता रहा है कि बदमाशों असामाजिक तत्वों के दिलो दिमाग से पुलिस का खौफ कानून का डर खत्म हो रहा है। सभासद 1 वार्ड के लोगों का चुना हुआ प्रतिनिधि होता है। उसके साथ उन लोगों की भावनाएं भी उस व्यक्ति के साथ जुड़ जाती हैं और आज वह उनके बीच नहीं रहा। एक सभासद की गोली मारकर जान लेना जिन लोगों का वह प्रतिनिधि था उनके लिए भी एक बड़ी चोट है। कोई किसी को मामूली सी बात पर गोली मारकर हत्या कर दे या ऐसे प्रयास लगातार प्रकाश में आने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिन्ह लग रहा है। असामाजिक तत्वों के दिमाग से पुलिस का भय बिल्कुल निकल चुका है। यही कारण है कि चुनाव में प्रतिद्वंद्विता में पराजित प्रतिद्वंदी खुलेआम सभासद को गोली मार दें। यह भी पुलिस के लिए सोचनीय है कि लोगों के दिमाग में पुलिस का इकबाल क्यों खत्म हो रहा है। 


क्षेत्र में आए दिन ऐसी वारदातें हो रही हैं किसी से रंगदारी मांगी जा रही है, हत्या हो रही हैं, जानलेवा हमले हो रहे हैं और छोटे-मोटे मामलों को तो पुलिस दर्ज कर कार्रवाई करना शायद अपनी तौहीन समझती है। जब पुलिस का पहरा कड़ा होने पर असामाजिक तत्व किसी घटना को अंजाम देने से पहले सौ बार अपने अंजाम के बारे में सोचता है लेकिन एक के बाद दूसरा हत्याकांड तीसरा सरेआम किसी को गोली मार देना ऐसी घटनाएं आए दिन सामने आ रही हैं। बदमाशों में वारदात करते समय यह खौफ होना चाहिए कि पुलिस उसे किस अंजाम तक ले जाएगी। यह एक प्रतिद्वंद्विता में सभासद की हत्या का ही मामला नहीं है। सवाल है कि आखिर बदमाशों के दिमाग से पुलिस का खौफ क्यों निकल गया। थाना क्षेत्र में सामूहिक हत्याएं हो जाती हैं। पुलिस कार्यवाही के नाम पर कुछ गिरफ्तारी करती है। वह मामला अभी पूरा सुलझ भी नहीं पाता है कि उससे पहले ही दूसरा मामला सामने आ जाता है। बहुत से ऐसे मामले भी होते हैं कि सूचना पर पुलिस को गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करनी चाहिए। लेकिन पुलिस उन्हें भी मामूली धाराओं में कार्रवाई कर अपने काफी लिखा पढ़ी की पूर्ति कर लेती है लेकिन पुलिस के द्वारा छोटी मानकर कार्रवाई किए जाने वाली घटना कभी-कभी बड़े हादसे को जन्म दे देती हैं। आम आदमी की सुरक्षा कि जिम्मेदारी पुलिस की होती है। एक चुना जनप्रतिनिधि जब सुरक्षित नहीं होगा तो और लोगों के मन में असुरक्षा की भावना पैदा होगी ही और यह डर लोगों के दिमाग में तब तक बना रहेगा जब तक इस तरह की घटनाएं नहीं रुकेंगी।


 


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