मानवीय गलतियों से तालाब हो गए मनुष्य के दुश्मन

मानवीय गलतियों से तालाब हो गए मनुष्य के दुश्मन


 


मुरादनगर। गांव के तालाब जोहड़ पहले लोगों के मित्र थे लेकिन मानवीय गलतियों से वह मनुष्यों के दुश्मन हो गए हैं। जो लोगों की जान तक लेने लगे हैं। खासकर गांव के बीच आबादी में स्थित तालाबों की हालत ज्यादा खतरनाक हो गई है। यदि तालाबों के बारे में ऐसी ही लापरवाही बरती गई तो आने वाले समय में वह खतरनाक हो सकती है। 


सरकार ने तालाबों के जीर्णोद्धार कब्जा मुक्ति जैसे कई अभियान चलाएं हैं लेकिन उन अभियानों का लाभ गिने चुने गांव को ही मिल पाया है। हालात यह है कि तालाबों में इतना कूड़ा करकट भर गया है कि वह तालाब की जगह दलदल बन गया है। बस्ती के निकट होने के कारण लोग कूड़ा कचरा तालाबों में फेंक देते हैं। घरों का गंदा पानी उन्हीं तालाबों में जा रहा है और वही तालाब का जहरीला हो चुका पानी लगभग पूरे गांव के पानी को दूषित कर चुका है। मुरादनगर विकासखंड के अंतर्गत 46 गांव हैं और लगभग हर गांव में तालाब हैं। कुछ गांव के तालाबों का सुधार हुआ है। कुछ सफाई ना होने के कारण जहरीले हो गए हैं। कुछ तालाबों को प्रशासन ने लोगों को पट्टे पर दिया हुआ है। उनमें भी मानकों के अनुरूप साफ सफाई नहीं होती और जिन तालाबों में मछली पालन का कार्य किया जा रहा है उनसे भी बड़ा खतरा होता है। खासकर आबादी के निकट होने वाला मछली पालन नुकसान देह हो जाता है।



इस मामले में गांव खिमावती के प्रधान अनिल त्यागी ने बताया कि उनके गांव में दो तालाब हैं। दोनों ही आबादी के नजदीक हैं। एक तालाब को प्रशासन ने मछली पालन के लिए दिया हुआ है। इसी तालाब के कारण गांव में कई लोगों की मौत हो गई थी। मछलियों में बीमारी फैलने के कारण तालाब की मछली मर गई थी और उसी के संक्रमण से कई लोगों की जान गई थी। दूसरा तालाब कूड़े करकट से पूरी तरह भर चुका है। वर्षों से सफाई नहीं हुई है। 


शासन की ओर से तालाबों की सफाई के लिए कोई सहायता ग्राम पंचायत से नहीं मिलती। उन्होंने बताया कि क्षेत्र के अनेकों गांव ऐसी ही हालत में है कि वहां के तलाब लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। इस बारे में प्रशासन को भी पत्र लिखे गए हैं लेकिन अभी कोई कार्यवाही नहीं होती दिख रही। प्रकृति ने तालाबों के रूप में गांव के लोगों को एक वरदान दिया था। उसी को लोगों ने कूड़ा दान बना दिया। जिसका जवाब तालाब भी प्रदूषण फैला कर दे रहे हैं। हालातों में सुधार के लिए ग्रामीण उन्हें कूड़ा कचरा डालना बंद करें। प्रशासन उनकी सफाई आदि के लिए कार्य योजना बनाएं तभी यह मनुष्य के मित्र बन सकते हैं। 


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