प्राइवेट स्कूलों की भी सुध ले सरकार - रामकिशन बंधु

प्राइवेट स्कूलों की भी सुध ले सरकार - रामकिशन बंधु



मुरादनगर। कोरोना संक्रमण के चलते लंबे समय से अवकाश के कारण कस्बे और देहात के निजी प्राथमिक एवं जूनियर हाई स्कूलों का अस्तित्व संकट में आ गया है। यही हाल बना रहा तो 'सब पढ़े सब बढ़े' का मिशन लेकर क्षेत्र में शिक्षा की अलख जगाने वाले यह छोटे-छोटे विद्यालयों के कपाट बंद होने लग जाएंगे और कुछ बंद हो भी चुके हैं। बड़े पब्लिक स्कूल अत्यधिक फीस वसूलने के कारण पब्लिक यानी आम जनता के नहीं अपितु वीआईपी स्कूल बन गए हैं। इन नामचीन बड़े स्कूलों में साधारण परिवारों के बालकों को शिक्षा मिल पाना दुष्कर है। ऐसे में मामूली सी फीस लेकर शिक्षा का प्रसार कर रहे कस्बाई स्कूलों को कोरोना काल ने परेशानी में डाल दिया है। स्कूल न खुल पाने के कारण फीस मिल पाना संभव नहीं है। साथ ही शिक्षकों का वेतन/मानदेय बोझ बना हुआ है। सरकार से किसी प्रकार की सहायता भी इन प्राइवेट स्कूलों को नहीं दी जाती है। उन्नत शिक्षा और अनुशासन के कारण गांवों कस्बों में स्थित इन छोटे स्कूलों में सरकारी स्कूलों से अधिक ही छात्र संख्या बनी रहती है। 


सरकार और समाज के महत्वपूर्ण दायित्वों के निर्वहन में जुटे इन विद्यालयों की हालत इस महामारी ने दयनीय बना दी है। ऐसे में मान्यता प्राप्त छोटे विद्यालयों को आर्थिक सहायता देकर ही बचाया जा सकता है। प्राइवेट स्कूल फेडरेशन के अध्यक्ष रामकिशन बंधु ने बताया कि छोटे विद्यालयों को जीवित रखना सरकार का कर्तव्य है। ऐसे में सरकार छोटे प्राइवेट स्कूलों को आर्थिक मदद प्रदान करें। तभी इन स्कूलों का अस्तित्व बच पाएगा।


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