गुरुओं को अपने कर्तव्यों से विमुख नहीं होना चाहिए - मुकेश सोनी 

गुरुओं को अपने कर्तव्यों से विमुख नहीं होना चाहिए - मुकेश सोनी 



मुरादनगर। शिक्षक दिवस अब शायद एक कहने का ही रह गया है। कुछ गुरु जन कर्तव्य विमुख हो गए हैं। छात्र-छात्राएं शिष्य भी गुरुजनों को इतना सम्मान नहीं दे रहे जितने कि वह अधिकारी हैं। इसके लिए गुरुजनों को भी गंभीर होना पड़ेगा। 


मुझे शिक्षक दिवस पर गुरु के चांटे का प्रसाद मिला था। मथुरा वृंदावन रोड़ पर स्थित प्रेम महाविद्यालय में मैं अध्यापनरत था। शिक्षक दिवस के दिन हम 4 मित्रों मुकेश सोनी भरतपुर निवासी रजिस्टर सिंह मथुरा के सदर बाजार क्षेत्र के राजकुमार तथा नौझील निवासी गोपाल ने हमारे हिंदी के अध्यापक राधा कुंड निवासी बैकुंठ शर्मा जी को शिक्षक दिवस पर भेंट करने के लिए एक कुर्ता खादी आश्रम से खरीदा और उन्हें भेंट वह शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देने के लिए उनके घर पहुंचे। उन्होंने हम चारों मित्रों की ओर देखते हुए पूछा कि कुर्ता खरीदने के लिए किसने सलाह दी। दोस्तों ने मेरी ओर इशारा कर दिया। गुरु जी ने कुर्ता लिया मेरे गाल पर एक चांटा भी रसीद किया कहा कि तुम चारों मिलकर यदि एक अच्छा पत्र लिखकर मुझे देते तो मुझे ज्यादा प्रसन्नता होती। तुम्हें अच्छा लिखने का एक अतिरिक्त अवसर मिलता और मुझे भी अपने शिष्यों की प्रतिभा देखने को मिलती। मैंने कई अखबारों के लिए लेखन किया। वीर अर्जुन में मुझे परम पूज्य के. नरेंद्र के दर्शन और महत्वपूर्ण मार्गदर्शन मिला। आप कहते थे कि पत्रकार की कलम की धार ऐसी होनी चाहिए कि जिसके खिलाफ लिखो या प्रशंसा करो दोनों ही आपके लेखन को स्वीकार करें। ऐसे थे पहले समय के गुरु जन जो अपने से अधिक शिष्यों का भविष्य सुनहरा बनाना चाहते थे। 


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