मुनेश जिंदल ने जिला अधिकारी को पत्र लिखकर जर्जर हो रहे सरकारी अस्पताल भवन निर्माण के लिए किया अनुरोध

मुनेश जिंदल ने जिला अधिकारी को पत्र लिखकर जर्जर हो रहे सरकारी अस्पताल भवन निर्माण के लिए किया अनुरोध



मुरादनगर। सरकारी दीवार 4 साल चल गई इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है। कार्यदाई संस्था का कमीशन काटकर इससे अच्छा कार्य कोई माई का लाल कराकर तो दिखाए। 4 वर्ष पूर्व निर्माण कराए गए हॉस्पिटल बिल्डिंग की दीवारों की ईंट बिखरनी शुरू हो गई हैं जिसके कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। खंड विकास कार्यालय स्थित राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय के नए भवन का 4 वर्ष पूर्व पुनर्निर्माण हुआ था। जिसमें एक चिकित्सक कक्ष झाले कक्ष तथा एक स्टोर बनाया गया था। लगभग 18 लाख रुपए की लागत से बनी यह अनेकों बिल्डिंग स्थानों पर हो जर्जर गई है। रोगियों के लिए बैठने की व्यवस्था ना के बराबर है। 


इस चिकित्सालय में सैकड़ों मरीज प्रतिदिन आते हैं। अस्पताल में दवा काफी मात्रा में उपलब्ध है लेकिन समस्याओं के चलते वह लोगों के लिए दूर हो रही है। मामूली बरसात होते ही अस्पताल परिसर पानी से भर जाता है। पिछले दिनों कई दिन तक पानी भरा रहने के कारण रोगियों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। साथ ही हॉस्पिटल कर्मचारी कर्मचारी भी मुसीबत में हैं। अस्पताल से बाहर आने जाने का रास्ता भी गंदा पानी रोक देता है। निर्मित कराई गई हॉस्पिटल बिल्डिंग कई स्थानों जर्जर हो चुकी है। सुरक्षा के पहले कोई इंतजाम नहीं है। यहां तक कि कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए कोई द्वार तक भी नहीं लगवाया गया है। रात्रि में कर्मचारी अपने भाग्य के भरोसे ही हैं। रोगियों के बैठने के लिए कोई प्रबंध नहीं हैं। सरकार एलोपैथी चिकित्सा पद्धति के अलावा अन्य चिकित्सकीय पद्धतियों के द्वारा भी इलाज की व्यवस्था के दावे कर रही है लेकिन यहां सबकुछ गोलमाल है। इस बारे में अखिल भारतीय मानव अधिकार समिति के कोषाध्यक्ष मुनेश ने इस बारे में जिलाधिकारी को पत्र लिखकर अस्पताल भवन की मरम्मत का अनुरोध किया है। जिससे मरीज अस्पताल कर्मचारी राहत की सांस ले। 


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