समाधान दिवस फरियादियों का नहीं

समाधान दिवस फरियादियों का नहीं


 


मुरादनगर। सरकार ने समाधान दिवस लोगों की समस्याएं दूर कराने के लिए प्रारंभ किया था। अधिकारियों की मनमानी फरियादियों की सुनवाई न होने के कारण यह दिवस भी औपचारिकता बनकर रह गया है। पीड़ितों का अब सरकारी मशीनरी से मोहभंग होने लगा है। यही कारण है कि समाधान दिवस एक घोषणा बनकर रह गया है। शासन द्वारा निर्धारित दिवस पर अधिकारी एक दूसरे को जिम्मेदारी सौंपकर अपना समाधान कर लेते हैं। जिनके ऊपर जिम्मेदारी सौंपी जाती है वह भी अधीनस्थों को बता देते हैं कि किस तरह से समाधान दिवस संपन्न हो। किसी की समस्या घर हो या न हो लेकिन समाधान दिवस बिना सक्षम अधिकारियों फरियादियों के बिना सफल घोषित किया जा रहा है। 


शनिवार को भी थाने में समाधान दिवस का आयोजन था जिस कार्यक्रम में अधिकारियों की पोल खुल सकती हो। उसे पुलिस दूर तक फटकने नहीं देती। कुछ देर में ही समाधान दिवस की औपचारिकताएं पूरी कर संबंधित अधिकारी कर्मचारी खुद गायब हो जाते हैं और उनके मोबाइल नंबर भी अनरीचेबल हो जाते हैं। 


 


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