हाथरस के दरिंदों को मिले जल्द सी जल्द सज़ा ए मौत 

हाथरस के दरिंदों को मिले जल्द सी जल्द सज़ा ए मौत 


 


मुरादनगर। हाथरस के दरिंदों को फास्ट्रेक न्यायालय में सुनवाई करा कर फांसी की सजा मिलनी चाहिए। इस बारे में नगर पालिका परिषद के सभासद मनोज ट्विंकल ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि हाथरस के गुनाहगारों को जल्द ही सजा मिले। महिलाओं के प्रतिदिन अपराध बढ़ रहे हैं जिसमें महिलाओं व छोटी बच्चों के साथ कुछ दरिंदे उनके साथ बलात्कार करके उन्हें हवस का शिकार बनाते हैं और उनकी हत्या भी कर देते हैं। हम एक तरफ बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा दे रहे हैं लेकिन आज बेटियों के साथ ऐसे जघन्य अपराध हो रहे हैं। जिसे देखकर हर मां बाप बेटी को पैदा होने पर अपने को बड़ा दुख प्रकट करता है जिसका समय बड़ा कार्य बेटियों व महिलाओं पर हो रहे देश में कहीं भी महिला को सुरक्षित नहीं है। पहले दिल्ली की एक बेटी के साथ बलात्कार हुआ। जिसे लेकर पूरे देश में आंदोलन किया गया। ऐसी ही एक बड़ा जघन्य कांड हाथरस की बाल्मीकि समाज की बेटी के साथ हुआ है और इससे अलग देश में कितनी बेटियां महिला इस जघन्य अपराध से लड़ रही हैं। जब तक हमारे देश में नाइजीरिया जैसा कानून ऐसे कांड के लिए नहीं बनाया जाएगा जब तक बेटी और महिलाओं के साथ ऐसे जघन्य अपराध होते रहेंगे और मां बाप बेटी होने पर दुख प्रकट करते हैं।



मनोज कहा कि मैं सभी से प्रार्थना करता हूं की देश में जल्द से जल्द सख्त लागू किया जाए और हाथरस में हुए इस कांड के अपराधियों को जल्द से जल्द मौत की सजा दी जाए। जिससे भविष्य में कोई व्यक्ति ऐसे कार्य को हिम्मत करने की कोशिश न कर सके। 



सच्चाई की रोशनी अखबार की एडिटर इन चीफ रिहाना पंवार का कहना है कि हर लड़की इस भयानक दुनिया में विश्वास के साथ बहुत सारे सपने देखती है। बड़ा संभल कर चलती है कि कहीं ऐसी डगर पर ना पहुंच जाए जहां उसकी आबरू पर चोट लगे। भले ही उसे किसी पिंजरे में कैद रहना पड़े। पर हमारे देश की लड़कियां उस पिंजरे की सजा सहने के लिए हरदम तैयार होती है। अपनी बेटियों के ऐसे मित्र की जरूरत है जिससे वह आपसे अपनी आपबीती सब बातें बता सके। नहीं तो कोई हैवान उसकी जीवन लीला के साथ खिलवाड़ करता रहेगा और वह बेचारी डर के मारे कुछ बता नहीं पाएगी। वह मुजरिम उसकी आंखों के सामने आता रहेगा और वह बेचारी किसी कोने में जाकर छिप जाएगी। 


मैं भी जब घर से बाहर जाती हूं तो कुछ नजरें ऐसी मिलती है। पर क्या किया जाए। मैं खुदको को ही ढक लेती हूं अपने आंचल से वर्ना किसी की निगाहें खराब होंगी और सजा मुझे दी जाएगी। रास्ते बदल दिए मैंने कुछ गंदे लोगों की वजह से। बहुत कुछ सहती हैं देश की बेटियां। बेटियों के लिए बहुत कुछ किया गया है लेकिन आज भी इस दुनिया में उनकी हिफाजत नहीं है। उन गंदी निगाहों से और पुलिस कहती हैं लड़की ड्रामा कर रही थी वाह ......क्या लोग हैं!


किसी की आबरू छीनी है। हड्डियां टूटी है। जिंदगी छीन गई और यह लोग अपनी जांच पड़ताल में लगे हैं। उस मासूम लड़की का इलाज भी ठीक तरीके से नहीं कर पाए क्यों ऐसा क्यों किया ? ऐसा ना जाने कितने सवाल पर कोई जवाब नहीं। इसलिए सभी सवालों को दफन कर देते हैं! अंत में मैं अपने शब्दों को विराम देते हुए दो पंक्तियां कहूंगी। 


जरा चोट लग जाने पर तुम्हारी मां सहम जाती है। 


सोचो जिसकी बेटी के साथ हैवानियत हुई हो उस मां का क्या हाल हो रहा होगा। 


देश की बेटी मनीषा के हक में फैसला होना चाहिए और मुजरिम को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को सख्ती से कार्रवाई कर ऐसे दरिंदों को उनके किए की सजा दिलाई जाए। 


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