मौत बनकर दौड़ रहे डग्गामार वाहन बंद कराया जाए - मुनेश जिंदल

मौत बनकर  दौड़ रहे डग्गामार वाहन बंद कराया जाए - मुनेश जिंदल




मुरादनगर। रोड पर डग्गामार वाहन मौत  बनकर दौड़ रहे हैं लेकिन संबंधित विभागों ने इस ओर से आंखें फेरी हुई है। वाहनों की जर्जर हालत फिटनेस के नियमों की धज्जियां उड़ा रही हैं। ऐसे वाहनों पर चालक थी नौसिखिया होते हैं। कोई डर भय न होने के कारण अधिकांश चालक शराब पीकर वाहन चलाते हैं। परिचालक के नाम पर भी मवाली टाइप के युवक रखे हुए हैं। ऐसी ही एक डग्गामार बस ने एक व्यापारी शिवकुमार गोयल 50 वर्ष को उस समय जोरदार टक्कर मार दी। जब वह दिल्ली जाने के लिए बस स्टैंड पर खड़े बस का इंतजार कर रहे थे। 
सरकार डग्गामार ऐसे जिनके पास परमिट आदि नहीं होते वाहन नहीं चलने देने के दावे कर रही है। वहीं इस क्षेत्र में ऐसे वाहन मौत बनकर बेलगाम दौड़ रहे हैं। अनाधिकृत रूप से चलने वाली बसें मेरठ दिल्ली बॉर्डर नोएडा साहिबाबाद के लिए यात्री बैठा कर चलती है। यात्रियों को भ्रमित करने के लिए उन पर उत्तर प्रदेश परिवहन निगम जैसे चिन्ह बनवाए हुए हैं जिसके कारण यात्री भी धोखे से उनमें बैठ जाते हैं। बसों में मनमाना किराया वसूल किया जाता है यदि कोई विरोध करने का प्रयास करता है। बस पर मौजूद परिचालक चालक उनके साथी मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। पुलिस छोटी-छोटी गलतियों पर बाइक स्कूटर जैसे छोटे वाहनों के चालान काटने में संकोच नहीं करती लेकिन ऐसे अवैध दौड़ रहे वाहन शायद उसे दिखलाइए नहीं दे रहे या फिर किसी वजह से चश्मा चढ़ाया हुआ है। 
सुबह शाम दर्जनों की संख्या में यहां से डग्गामार वाहन सवारियां भरकर दिल्ली से मेरठ मेरठ से दिल्ली की ओर दौड़ते हैं। गाड़ियों की जर्जर हालत नौसिखिया चालकों के कारण बसों में सवार लोगों की जान भगवान भरोसे ही रहती है। वहीं सरकार को भी मोटे राजस्व का चूना लग रहा है जिन यात्रियों को सरकारी बसों में यात्रा करनी होती है, वह इन में सवार हो जाते हैं। इससे उत्तर प्रदेश परिवहन निगम को भी मोटी चपत लग रही है। मानव अधिकार निगरानी समिति के कोषाध्यक्ष मुनेश जिंदल ने   बताया कि उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर अवैध रूप से चलने वाली बसों पर रोक लगाने की मांग की है।

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