होम्योपैथिक अस्पताल का हो पुनर्निर्माण - विनोद जिंदल

होम्योपैथिक अस्पताल का हो पुनर्निर्माण - विनोद जिंदल 




मुरादनगर। होम्योपैथिक अस्पताल खुद बीमार ही नहीं गंभीर हालत में है जो कभी भी गिरकर जमीन से मिल सकता है और यदि ऐसा हादसा अस्पताल खुलने के दौरान हुआ तो बड़ी जनहानि भी हो सकती है। श्मशान घाट की नई छत के नीचे दब कर लोग अपनी जान गवां बैठे। विकास खंड कार्यालय के निकट स्थित होम्योपैथिक अस्पताल की बिल्डिंग काफी पुरानी होने के कारण जर्जर हालत में पहुंच गई है जिसके हर समय गिर जाने का खतरा बना रहता है। यहां मरीज भी आते हैं। होम्योपैथिक चिकित्सक भी इसी जर्जर भवन में बैठकर लोगों की चिकित्सा करते हैं। बरसात के मौसम में पानी अस्पताल में भर जाता है। दीवारें झड़ रही हैं। छत कब गिर जाए इसका कुछ पता नहीं है। अस्पताल में जाने वाले मरीज तथा चिकित्सा कर्मी जब तक अस्पताल में रहते हैं तब तक उन्हें यही खौफ सताता रहता है कि कहीं अस्पताल अचानक गिर न जाए। 
यहां तैनात चिकित्सक कई बार इस बारे में विभाग को पत्र लिखकर सूचना दे चुके हैं लेकिन अधिकारी इस और ध्यान नहीं दे रहे। शायद उन्हें किसी हादसे का इंतजार है। एलोपैथिक आयुर्वेदिक दवाओं के साथ ही बड़ी संख्या में लोग होम्योपैथिक दवाइयों से भी स्वास्थ्य लाभ लेते हैं। होम्योपैथी का इलाज रोगी के लक्षणों के अनुसार किया जाता है जिसके लिए विशेषज्ञ डॉक्टर की आवश्यकता होती है। अन्य दवाएं रोगानुसार दी जाती हैं जो कि शीघ्र ही असरकारक होती हैं लेकिन होम्योपैथी में किसी भी रोग को पूर्ण समाप्त करने के लिए इलाज किया जाता है। स्वास्थ्य विभाग ने उसी को देखते हुए यहां होम्योपैथिक चिकित्सालय प्रारंभ कराया था। दवाइयां भी हैं चिकित्सक भी हैं मरीज भी आते हैं लेकिन अस्पताल की हालत देखकर उसमें जाने से घबराते हैं।
 क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि अस्पताल की बिल्डिंग का पुनर्निर्माण कराया जाए जिससे लोगों के सिर मंडरा रहा खतरा टल सके और लोग निर्भीक होकर यहां अपना इलाज कराने आ सके। इस बारे में शिक्षाविद व प्रमुख समाजसेवी विनोद जिंदल ने   बताया कि होम्योपैथिक अस्पताल से बड़ी संख्या में लोग लाभ उठाते हैं। उसका पुनर्निर्माण आवश्यक है।
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