कहां है गौशाला गौ भक्त - कूड़े में चारा तलाश करने को विवश है गोवंश

कहां है गौशाला गौ भक्त - कूड़े में चारा तलाश करने को विवश है गोवंश




 मुरादनगर। कहां है गौशालाए और गौ भक्त बेसहारा गोवंश कूड़े के ढेरों में पेट भरने के लिए चारा ढूंढ रहे हैं सरकार कह रही है कि गोवंशों के संरक्षण के लिए गौशाला चलाई जा रही हैं। गाय पालने के लिए आर्थिक मदद दी जा रही है कुछ सामाजिक संगठन भी गौ भक्त होने का दावा करते हैं। गौशाला के लिए गाड़ियों द्वारा कालोनियों से भी रोटी और चारा लोगों से एकत्र किया जाता है लेकिन फिर भी गोवंश भूखा है। या तो सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का ठीक से क्रियान्वयन नहीं हो रहा या फिर उसमें भी चारा घोटाले जैसी कोई गड़बड़ की जा रही है। शहर के आसपास खेत खत्म हो गए हैं कालोनियों से भी वहां भटकने वाले पशुओं को पर्याप्त खुराक नहीं मिल पाती और कोरोना लॉकडाउन के दौरान जो कुछ रोटियां उन्हें मिल जाती थी वह भी घट गई। मजबूरी में गोवंशों को सड़कों किनारे पड़े कूड़े के ढेरों में अपने खाने के लिए कुछ ढूंढना पड़ता है। कूड़े के ढेर में पॉलिथीन प्लास्टिक कचरा अधिक होता है वह भी गोवंश के पेट में पहुंच जाता है जिसके कारण उनकी मृत्यु तक हो सकती है। नगर में बहुत से लोग गौ भक्त होने का दावा तो करते हैं लेकिन भूखे बेसहारा पशुओं के चारे का कोई इंतजाम उनके द्वारा किया जाता दिखलाई नहीं देता। दावे होते हैं फोटो खिंचवाई जाते हैं सोशल मीडिया पर चलाकर गौ रक्षा की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं लेकिन असलियत कुछ और ही है। पहले खेतों से इन पशुओं की भूख तृप्ति हो जाती थी लेकिन अब आसपास खेत ही नहीं रहे इसलिए अब वह खाने के लिए पराधीन हो गए हैं। कोई देगा तो खाएंगे अन्यथा कूड़े के ढेरों को टटोलना उनकी मजबूरी है। शहर में बहुत से स्थानों पर झुंड के झुंड कूड़े के ढेरों पर देखे जा सकते हैं। भूखे पशु कभी-कभी आक्रोशित हो आने-जाने वाले लोगों पर हमला तक कर बैठते हैं। रेलवे रोड पर दो तीन स्थानों पर हर समय उनका जमावड़ा लगा रहता है कई बार राहगीरों को भी घायल कर चुके हैं लेकिन जिनकी जिम्मेदारी उनको संभालने की है शायद उन्हें जमीनी स्थिति देखने की फुर्सत नहीं है या फिर जानबूझकर अंजान बने हुए हैं। इस बारे में कई लोगों बताया कि कूड़े के ढेरों में घरों से निकला कूड़ा कचरा होता है जिसमें कुछ खाद्य पदार्थ भी होते हैं लेकिन पॉलिथीन जैसे घातक पदार्थ भी होते हैं और वह भी उनके पेट में पहुंच जाता है।
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