गरीबों के हक पर डांका राशन डीलरों को अधिकारियों का संरक्षण

गरीबों के हक पर डांका राशन डीलरों को अधिकारियों का संरक्षण


मुरादनगर। गरीबों के निवाले पर राशन डीलर विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से डाका डाल रहे हैं। गरीबों के पेट पर लात मार कर अपना पेट मोटा करने में लगे हैं। जिसके कारण गरीब को उनका हक नहीं मिल रहा और सरकार की किरकिरी हो रही है। सरकार द्वारा घोषित राहतों पर हो रहे खेल आगामी विधानसभा चुनावों में सरकार को भारी पड़ सकते है। क्योंकि उसके किए वादे लोगों की कसौटी पर खरे नहीं उतर रहे राशन डीलर खाद्य वितरण विभाग मनमानी कर रहे हैं जिससे सरकार की बदनामी हो रही है। सरकार द्वारा कोरोना की भयानक लहर में लोगों को निशुल्क राशन उपलब्ध कराने की घोषणा की हुई है, जिसमें प्रत्येक परिवार को सदस्यों की संख्या के अनुसार प्रति यूनिट 5. 5 किलो गेहूं चावल चना अन्य सामग्री उपलब्ध कराई जा रही हैं। लेकिन राशन डीलर लोगों को निर्धारित मात्रा में सामान न देकर आधा ही दे रहे हैं। जितना सामान जनता में बट रहा है उतना ही राशन डीलर हजम कर रहे हैं। सामान्य दिनों में सरकारी रेट पर मिलने वाले राशन में कटौती के साथ ही निर्धारित दर से अधिक रुपए की वसूली की जाती है। ऐसा संभव नहीं है कि संबंधित विभाग के अधिकारियों को इतनी बड़ी धांधलीयों के बारे में पता न हो, क्योंकि लोगों द्वारा शिकायतें करने के बावजूद भी डीलरों पर शिकंजा नहीं कसा जा रहा। जिम्मेदार अधिकारी लोगों को गलत डीलरों को सही साबित कर रहे हैं। शिकायतों पर गांव काकड़ा आदि में विभागीय कर्मचारी जांच करने गए थे, लेकिन उन्होंने लोगों द्वारा डीलरों द्वारा की जा रही चोरी की शिकायतों को अनसुना करते हुए डीलर का बचाव करने लगे जिससे लोग भड़क उठे और टीम को उल्टे पांव भागना पड़ा। ग्रामीणों ने इससे संबंधित वीडियो भी सोशल मीडिया पर साझा की है। बावजूद उसके राशन डीलर लोगों को धमका रहे हैं कि जितना दिया जा रहा है चुपचाप लेकर चले जाओ अन्यथा अगली बार इतना भी नहीं मिलेगा। काकड़ा निवासी बुजुर्ग राजवीर सिंह तथा महिला ने बताया कि डीलर कभी भी पूरा सामान नहीं देते। इस बारे में सर्राफा उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष लोकेश सोनी ने बताया कि शहरी क्षेत्र के डीलर भी मनमानी कर रहे हैं खाद्य आपूर्ति अधिकारी का कार्यालय यहां है लेकिन वह वहां मिलते ही नहीं। 

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