गंगाजल में विलीन हो जाती हैं अस्थि दुनिया में यहीं भगवान वराह मंदिर तुलसीदास का जन्म भी यहीं हुआ था

 गंगाजल में विलीन हो जाती हैं अस्थि दुनिया में यहीं भगवान वराह मंदिर तुलसीदास का जन्म भी यहीं हुआ था



मुरादनगर। तीर्थ सोरों शूकर क्षेत्र में स्थित गंगा जी में अस्थियां पानी में बदल जाती हैं विश्व में भगवान वराह का एकमात्र मंदिर भी यही है। श्री रामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी श्री तुलसीदास की जन्म स्थली भी यही है। उसके कई सबूत मौजूद हैं यह जानकारी बी.एस.सी. तृतीय वर्ष की छात्रा प्रियंका सोनी ने यह जानकारी देते हुए बताया कि बस ट्रेन दोनों से ही वहां पहुंचा जा सकता है। गाजियाबाद से लगभग 200 किलोमीटर की दूरी पर है राजस्थान हरियाणा से यहां बड़ी संख्या में यात्रा के लिए पहुंचते हैं। पूरे विश्व में भगवान वराह का एकमात्र मंदिर भी यहां स्थित गंगा घाट पर अस्थि विसर्जन के 24 घंटे में पानी में समा जाती हैं। यहां हर प्रदेश जिले पंडे रहते हैं जिनके पास कई पीढ़ियों की जानकारियां है। कभी-कभी न्यायालय भी उन जानकारियों के अधिकार पर निर्णय ले लेते हैं यहां से हरियाणा राजस्थान के शिव भक्त कार्ड भी ले जाते हैं। क्योंकि बहुत बड़ा मेला होता है माघ महीने में यहां गंगा स्नान का मेला लगता है जिसमें बड़ी संख्या में दूर दूर से आकर लोग धर्म लाभ उठाते हैं। यह उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले का महत्वपूर्ण शहर है कासगंज के जिलाधिकारी तथा और प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालय भी यही बने हुए हैं। इसलिए अब पहले से और विकसित हो गया है अपने स्वर्गवासी के फूल अस्थि कपड़े की थैली में बांधकर गंगा जी में लटका देते हैं जो 24 घंटे बाद खाली मिलती है। गंगा जी का घाट पक्का है लेकिन गंगा में जाने के बाद पैरों में अस्थियां नहीं आतीं। हिंदुओं के धर्म की आस्था के केंद्र तीर्थ के विकास की सरकार विशेष तैयारी कर रही है।


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