जीडीए कार्यवाही से पहले डीलर खुद बसवाते हैं आशियाने, मध्यम वर्ग की पहुंच से बाहर हो जाएंगे जमीनों के दाम

जीडीए कार्यवाही से पहले डीलर खुद बसवाते हैं आशियाने, मध्यम वर्ग की पहुंच से बाहर हो जाएंगे जमीनों के दाम


मुरादनगर। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा मुरादनगर क्षेत्र में की जा रही ताबड़तोड़ कार्यवाही कालोनियों पर बुलडोजर चलाए जा रहे हैं। अवैध बता कर कुछ निर्माणों को तोड़ा गया है जहां तोड़फोड़ की कार्रवाई संभव नहीं थी, उनको भी चिन्हित किया गया है। जिसके कारण प्रॉपर्टी का कारोबार करने वाले निराश हैं और जो लोग एक छोटा सा आशियाना बनाने का सपना देख रहे थे उन्हें भी अपनी आशाओं पर पानी फिरता दिख रहा है। क्षेत्र में अभी तक जितनी भी कॉलोनी अब बनी है उनमें से एक भी कॉलोनी विकास प्राधिकरण से स्वीकृत नहीं है। आम लोगों का सवाल है कि जब यह कालोनियां कट रही थी डीलर मकान बना रहे थे तब जीडीए वाले कहां थे। अवैध कालोनियों के निर्माण में जीडीए के कर्मचारी अधिकारियों का पूरा सहयोग प्रॉपर्टी डीलरों को मिलता रहा है। अधिकांश उन्हीं कालोनियों पर बुलडोजर चलता है जहां से जीडीए के कर्मचारियों अधिकारियों से सेटिंग नहीं हो जाती, उसके बाद पूरी कॉलोनी कट जाती है। प्लॉट बिक जाते हैं मकान बनने शुरू होने पर एक बार फिर जीडीए कर्मचारियों को कमाने का मौका मिलता है। निर्माणाधीन बिल्डिंग का निर्माण कार्य अवैध कॉलोनी बताते हुए रुकवा दिया जाता है। आश्चर्य जब होता है तब काम दोबारा चालू दिखता है अभी तक यहां के डीलर खेत मालिक से खेत खरीद कर उसमें आवासीय रजिस्ट्री करा देते थे जिसमें डीलर उतना ही लाभ लेते थे। 10% के करीब बढ़कर प्लाट के रेट मध्यमवर्ग की पहुंच में रहते थे। कॉलोनाइजर यदि कालोनियों को जीडीए से नियमित करा कर बेचेगा, जिससे जमीन के भाव आसमान छूने लगेंगे और मध्यम वर्ग के लोगों के छोटा सा हो अपना आशियाना के सपने मुरादनगर में पूरे नहीं हो सकेंगे। क्योंकि यह स्थान ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे गंग नहर पर प्रस्तावित फोर लाइन रोड दिल्ली मेरठ रैपिड रेल से भी जुड़ने जा रहा है। यदि जीडीए यहां नई कालोनियां काटने पर रोक लगा रहा है तो उसे वैकल्पिक व्यवस्था कर खुद कालोनियां विकसित कर लोगों को सस्ते घरों की उपलब्धता करानी चाहिए। इस बारे में ऐसे कई लोगों से जानकारी ली। इस बारे में जिंदल मार्बल्स के मालिक मुनेश जिंदल ने बताया कि यहां का ग्राहक गाजियाबाद के राजनगर में प्लॉट खरीद ले वह बहुत बड़ी बात होगी। क्योंकि संपन्न परिवार नई कालोनियों में जाएंगे नहीं और गरीबों को मिलेंगे नहीं क्योंकि जीडीए से स्वीकृत कालोनियों में प्लॉट काफी महंगे हो जाएंगे। सर्राफा व्यापार मंडल के अध्यक्ष लोकेश सोनी ने बताया कि यहां कालोनियों के रेट भी हिंदू मुस्लिम से तय होते हैं। मुस्लिम कालोनियों में प्लाट पहले सस्ते थे लेकिन अब वहां भी महंगाई दिखने लगी है और कुछ कालोनियों में तो यहां भी अन्य महानगरों के रेटों में जमीन बिक रही है।



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