गांव जलालाबाद में न पीने का पानी और ना गांव में जाने के रास्ते ग्रामीण कह रहे हैं चलो शहर की ओर

गांव जलालाबाद में न पीने का पानी और ना गांव में जाने के रास्ते ग्रामीण कह रहे हैं चलो शहर की ओर


मुरादनगर। "मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोती" इस गाने के बोल जिस गांव जलालाबाद में "उपकार" फिल्म की शूटिंग में फिल्माया गया था, आज उस गांव के हालात उस समय के हालातों से बिल्कुल उल्टे हैं। यहां माटी, हीरे, मोती नहीं बीमारियां बंट रही है।  कैंसर, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, लीवर की बीमारियां लोगों को मिल रही हैं। सरकारें नारा दे रही हैं "चलो गांव की ओर" लेकिन जैसी नरकीय स्थिति इस गांव की है वहां से तो लोग "चलो शहर की ओर" ही कहने को मजबूर हैं।



क्षेत्र का गांव जलालाबाद जाट बाहुल्य है। लेकिन और भी सभी जाति धर्म के लोग आपसी भाईचारे से रहते हैं। इस गांव की सबसे बड़ी समस्या यह है कि मुरादनगर मेरठ दिल्ली हाईवे से गांव में जाने के लिए इतना भी रास्ता नहीं है कि कोई बारात की बस चली जाए। कारण है रास्ते के बीचो-बीच बना रेलवे पुल जो काफी निचाई पर है। उसके नीचे से दो पहिया वाहन चालक या कार आदि निकल सकते हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए ग्रामवासी कई बार रेलवे मंत्रालय व अन्य संबंधित मंत्रालयों को पत्र भेजकर यहां ओवरब्रिज बनाए जाने की मांग कर चुके हैं। लेकिन किसी ने इस ओर आज तक ध्यान नहीं दिया।



गांव जलालाबाद कभी अवध प्रांत का परगना हुआ करता था। इसके दीवान भटनागर परिवार के मुंशी भटनागर बतलाए जाते हैं।पहले यह गांव इसका आसपास का नैसर्गिक सौंदर्य देखने योग्य होता था। ऐसा कुछ जो लोग बताते हैं, उसी वजह से यह स्थान फिल्म बनाने वालों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन गया था।



सरकार कह रही है कि गांव शौच मुक्त स्वच्छ हो चुके हैं। इस गांव में गंदे पानी की निकासी का कोई ऐसा साधन नहीं है कि गंदा पानी आगे बह जाए। घरों से निकला पानी गांव में आधे रह चुके तालाबों में गिरता है। जिसके कारण यहां का जलस्तर खतरनाक श्रेणी में पहुंच गया है। जो बहुत सी बीमारियां लोगों को दे रहा है।


गांव के बुजुर्ग जयप्रकाश का कहना है कि सभी घरों में शौचालय नहीं बन पाए हैं। इसके कारण अभी बहुत से लोगों को खुले में शौच जाना पड़ता है।



चिकित्सा के नाम पर यहां नूरपुर रोड पर वर्षों पूर्व सरकारी अस्पताल खुला था। लेकिन उसमें स्टाफ नहीं आया और बिल्डिंग खंडहर हो गई।


एक आयुर्वेदिक चिकित्सालय भी गांव में है। लेकिन उसके लिए अपना भवन नहीं है। वह किराए पर ही चलता है। वहां कब कौन डॉक्टर आता है यह किसी ग्रामीण को भी ठीक से पता नहीं है।


शिक्षा के लिए गांव में प्राथमिक से आठवीं क्लास तक के 3 स्कूल हैं। लेकिन उससे आगे की शिक्षा के लिए बच्चों को मुरादनगर, मोदीनगर, गाजियाबाद की ओर देखना पड़ता है। जबकि गांव की आबादी के हिसाब से वहां इंटर कॉलेज होना चाहिए।


परगना जलालाबाद के दीवान रहे मुंशी लाल अरोड़ा के वंशज कृष्ण कुमार भटनागर यहां मुरादनगर में रहते हैं।



उन्होंने बताया कि गांव में पहले एक हवेली हुआ करती थी। जिसमें सभी मुकदमे सुने जाते थे। समय के साथ साथ हवेली जर्जर हो गई। आसपास की आबादी को उसके गिरने से नुकसान न हो इसलिए उसे तुड़वा दिया गया। मुरादनगर हाईवे से 3 किलोमीटर की दूर स्थित इस गांव तक पहुंचने के लिए वाहनों का भी कोई इंतजाम नहीं है। रास्ता कम होने की वजह से बसे यदि पहुंचती हैं तो कई किलोमीटर लंबा चक्कर लेने के बाद। जोकि मुरादनगर से जलालाबाद की लोकेशन ही बदल देता है।


समय के साथ साथ कच्ची गलियां पक्की सड़कों वाली हो गईं। सरकारी नल भी लग गए। नालिया भी पक्की बन गईं। लेकिन गंदगी गांव से बाहर जाने का कोई रास्ता नहीं है। गांव की पक्की सड़कें हैं लेकिन मुख्य मार्ग पर बड़ा अवरोधक है।


गांव के निवासी केपी तोमर ने बताया कि गांव के  गंदे पानी निकास का कोई  इंतजाम नहीं है। जिसके कारण गांव का पानी दूषित हो चुका है। गांव में एक पशु चिकित्सालय भी है। जिस पर सुविधाएं नाम मात्र की है और वहां से सिर्फ पर्ची लिखकर ही इलाज किया जा रहा है।


स्वच्छ गांव, चारों ओर फैला गोबर जो तालाब कभी जिंदगी को लंबी करने का काम करते थे। वह आज खुद छोटे हो गए हैं। किसी ने गोबर डाल दिया है तो किसी ने और किसी तरह से कब्जा कर लिया है। जिसके कारण जमीन का पानी भी जहरीला हो गया है।


ग्राम प्रधान व जनप्रतिनिधि इन भयंकर हालातों से निपटने का कोई भी प्रयत्न करते नहीं देते। कुल मिलाकर पूरा गांव कह रहा है कि "चलो शहर की ओर" हालांकि बुजुर्ग अभी जैसी स्थिति है उसी में रहने में खुश हैं। क्योंकि इसके अलावा कोई चारा नहीं और युवा धीरे धीरे रोगों की चपेट में आ रहे हैं।


यह गांव एक बार दबंगई की लड़ाई का दंश भी झेल चुका है। जिसमें दर्जनों लोग अपने प्राणों से हाथ धो चुके हैं। बुजुर्ग फिर भी चाहते हैं कि गांव आबाद हो और सरकार यहां की ऐसी समस्याओं को दूर करें। जिससे लोग दोबारा कहने लगे चलो।


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