प्लास्टिक को ना मीठे से सवार रहा है जिंदगी... मुरादनगर का विकास

मुरादनगर प्लास्टिक की बंदी ने उसका कारोबार करने वाले लोगों के सामने रोजगार का संकट खड़ा कर दिया है



पर्यावरण सुरक्षित रहे और भूखों भी न सोना पड़े इसका उदाहरण मुरादनगर के शिक्षा कम लेकिन हौसले बुलंद विकास ने लोगों के सामने रखा है। उसका कहना है कि जान है तो जहान है यदि दुनिया को नुकसान देने वाले काम  को बंद कर जिंदा रहे तो काम बहुत हैं। विकास 28 वर्ष यहां की प्रीत विहार कॉलोनी में अपने पिता मथुरा प्रसाद के साथ रहता है। 10 वर्षों से वह प्लास्टिक के घरेलू इस्तेमाल के सामान  बच्चों के खिलौनों का ठेला लगाकर लेकर कालोनियों में प्लास्टिक के सामान बेचता था। आठवीं तक की शिक्षा के कारण वह समाचार पत्र आदि पढ़ लेता है।


विकास ने बताया कि समाचार पत्रों में कई बार प्लास्टिक के दुष्परिणामों की जानकारी पढ़ी। फिर लोगों ने बताया की प्लास्टिक  बैन हो गया है। वह कार्य बंद करना पड़ा कुछ दिन फाके भी हुए लेकिन अब वह बच्चों के मुंह में मिठास घोल अपनी जिंदगी के कदम आगे की ओर बढ़ा रहा है। मुरादनगर के सार्वजनिक स्थानों पर यह युवक एक थाली में बच्चों की टॉफिया बेचता हुआ दिखलाई देने वाला शहर का शायद इकलौता ही युवक है। जो ₹20 की स्टील की थाली और ₹50 की टॉफी से अपनी तरह का व्यापार कर अपना व अपने पिता का जीवन यापन कर रहा है। विकास ने बताया कि आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण अभी तक शादी नहीं हुई है। लेकिन उसे भरोसा है की टॉफियों की कमाई से ही वह शादी का इंतजाम भी कर लेगा। मुकेश सोनी


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