गणपति भी हुए इको फ्रेंडली 

गणपति भी हुए इको फ्रेंडली 



मुरादनगर। चिकनी काली मिट्टी से बिना सांचे के बनायी गयी इको फ्रेंडली श्री गणपति की मूर्ति लोगों को आकर्षित कर रही है। 


विजय मंडी निवासी मनीष गोयल ने बताया कि वे पिछले 8 वर्षो से चिकनी मिट्टी से बिना किसी सांचे के भगवान श्री गणेश की प्रतिमा हाथ से बना रहे हैं। इस बार लगभग डेढ़ फुट ऊँची वीणा बजाते हुए श्री गणपति की प्रतिमा बनायी है। परिवार के सभी सदस्य पूरे उत्साह के सहयोग करते हैं। कलर व श्रृंगार करने के बाद अत्यन्त आकर्षक बन गयी। 


उन्होंने बताया कि एनजीटी के प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनाई मूर्तियों को जल प्रवाह करने पर लगाई पाबन्दी के बाद उन्हें मिट्टी से मूर्ति बनाने की प्रेरणा हुई। वर्ष 2012 से वे निरंतर मिट्टी से प्रतिमा बना रहे हैं तथा गणेश चतुर्थी पर स्थापना करते है। प्लास्टर ऑफ पेरिस व केमिकल युक्त मूर्तियां पर्यावरण को हानि पहुंचाती हैं तथा बाद में मूर्ति के अवशेष रह जाने से ईश्वर का अनादर भी होता है। वहीं मिट्टी से बनी यह गणेश प्रतिमा पूर्णतः पर्यावरण अनुकूल है। जो जल में प्रवाहित करने के कुछ ही समय में जल में मिश्रित हो जाती है। प्रतिमा को देखने के लिए काफी संख्या में लोगों का तांता लगा रहता है। 


 


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