श्मशान घाट त्रासदी मुद्दा विधायक ने विधानसभा में उठाया, पीड़ितों को सहायता की मांग

श्मशान घाट त्रासदी मुद्दा विधायक ने विधानसभा में उठाया, पीड़ितों को सहायता की मांग


आरोपी अधिशासी अधिकारी की जमानत






मुरादनगर। क्षेत्रीय भाजपा विधायक अजीत पाल त्यागी ने उखलारसी श्मशान घाट त्रासदी को विधानसभा में उठाते हुए जहां घायलों के इलाज का प्रबंध किए जाने तथा मृतक परिवारों को घोषित सभी सहायता जल्द उपलब्ध कराएं जाने की मांग कर जहां घायलों को मरहम का इंतजाम करने का प्रयास किया है। वहीं मृतक परिवारों को भी नौकरी आदि की व्यवस्था की भी कोशिश की है जिससे संबंधित परिवार अपना जीवन यापन कर सके। क्षेत्र के लोगों ने विधायक अजीत पाल त्यागी की इसलिए प्रशंसा की है कि वह अपने क्षेत्र अपने मतदाताओं के हितों से समझौता नहीं करते। वहीं पीड़ित परिवारों को भी एक उम्मीद की किरण नज़र आने लगी है क्योंकि उनके जनप्रतिनिधि ने लखनऊ तक उनकी बात पहुंचाई। लेकिन लोगों के मन को यह बात कचोट रही है कि दोषियों को सजा दिलाने के लिए कोई पैरवी करता नहीं दिखलाई दे रहा। 
हादसे के समय क्षेत्रीय सांसद केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह तथा विधायक अजीत पाल त्यागी पीड़ितों के बीच पहुंचे थे। लोगों ने सहायत के साथ भ्रष्टाचारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। उस समय भी त्यागी ने आश्वासन दिया था कि सरकार द्वारा घोषित सभी सहायता दिलाने तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए वह कृत संकल्पित हैं। उनके द्वारा इस गंभीर हादसे को विधानसभा में उठाने के बाद जहां लोगों को यह एहसास हुआ है कि उनका विधायक उनके साथ है वही इस मामले में चल रही जांच की कार्रवाई तेजी से होने की उम्मीदें बनी है। 
3 जनवरी 2021 को उखलारसी श्मशान घाट में नगर पालिका परिषद द्वारा बनाए गए नए बरामदे के गिरने से 24 लोग दिवंगत हो गए थे तथा इतने ही लोग घायल हुए थे। मृतकों के परिवारों को सरकार की ओर से आर्थिक सहायता के रूप में 1000000 रुपए मिल चुके हैं लेकिन नौकरी और मकान के बारे में अभी किसी को कुछ पता नहीं चल रहा। प्रशासन ने घायलों को उनके हाल पर छोड़ दिया था जिसके पास कितना रुपया था उतना इलाज हुआ। उसके बाद उन्हें अस्पतालों से घर भेज दिया गया था लेकिन अब अजीत पाल त्यागी द्वारा यह मामला उठाने से घायलों को भी समुचित इलाज मिलने की उम्मीद है। इसी बीच सूत्रों से सूचना मिली है कि लखनऊ जेल में बंद यहां की अधिशासी अधिकारी रही निहारिका चौहान को न्यायालय ने जमानत दे दी है और वह भी इस मामले में आगे की कार्रवाई के बारे में सलाहकारों से सलाह ले रही हैं। अब देखना यह है कि विधान मामले को विधानसभा पटल पर रखे जाने के बाद लोगों को क्या सहायता और दोषियों को क्या दंड मिलता है।
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