क्या होगा ग्राम पंचायत चुनावों का ?




क्या होगा ग्राम पंचायत चुनावों का ?


मुरादनगर। ग्राम पंचायत चुनाव अभी होंगे या समय और बढ़ेगा। यह एक बड़ा प्रश्न ग्रामीण मतदाताओं में सबसे बड़ी चर्चा का विषय है। हालांकि इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेशों पर सरकार ने वर्ष 2015 के आधार पर आरक्षण प्रक्रिया पूरी कर चुनाव कराने की घोषणा कर दी है लेकिन मामला सर्वोच्च न्यायालय मे पहुंचने के बाद चुनाव समय पर हो पाएंगे इसको लेकर लोगों को शक है। हालांकि 26 मार्च को दूसरी याचिका पर सुनवाई होनी है। उस फैसले पर भी बहुत कुछ निर्भर है यदि सरकार को न्यायालय से फिर कोई नया आदेश मिला और उसको पूरा करने में कितना समय लगेगा अभी यह भी नहीं कहा जा सकता। पहले से तैयारियों में जुटे प्रत्याशियों को बड़ा झटका आरक्षण के कारण लगा। कुछ नए प्रत्याशी तैयारी करने में जुटे ही थे कि 2015 के आधार पर आई आरक्षण सूची ने फिर दोबारा चुनाव लड़ने वालों को अदला-बदली के लिए मजबूर कर दिया। 
भावी प्रत्याशी नई सूची के आधार पर अपने-अपने क्षेत्रों में मतदाताओं के बीच पहुंच रहे हैं लेकिन मामला दोबारा न्यायालय में पहुंच जाने के कारण अभी वह भी असमंजस की स्थिति में है। सीटों के आरक्षण में दोबारा बदलाव न हो जाए वहीं ग्रामीण मतदाता भी अभी वोट किसे दें यह तय करने से पहले अभी चुनाव अभी होंगे या कब यह अटकलें लगा रहे हैं। ग्रामीण राजनीति की जानकारी रखने वाले लोग यह आशंका जता रहे हैं कि चुनावों के लिए समय बढ़ाया जा सकता है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में किसान आंदोलन के कारण सत्ताधारी पार्टी कमजोर स्थिति में है और यदि ग्राम पंचायत चुनावों में पार्टी समर्थित प्रत्याशी हारे तो वह अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव पर भी प्रभाव डालेंगे। इसलिए सरकार भी चुनावों को कुछ दिन के लिए टालने के प्रयास कर सकती है क्योंकि न्यायालय को अब प्रदेश सरकार का पक्ष भी सुनना है लेकिन यदि न्यायालय ने समय पर चुनाव कराने के आदेश दिए तब सरकार की मजबूरी होगी। चुनाव में जाना अब लोगों की निगाहें 26 मार्च को होने वाली सुनवाई तथा उसके नतीजों पर हैं। इस बारे में बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव विजय गौड़ ने  बताया कि सर्वोच्च न्यायालय में सरकार ने अपना पक्ष सुनने आग्रह किया है सुनवाई के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
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