बिजली लाइनें बनी अभिशाप - मनोज टिंकल सभासद

बिजली लाइनें बनी अभिशाप - मनोज टिंकल सभासद




मुरादनगर। बिजली की हाईटेंशन लाइन से उतरे करंट की चपेट में आने से गांव बसंतपुर सैंतली में कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए व लोगों के महंगे इलेक्ट्रिक सामान फुंक गए। विद्युत लाइनों के कारण जब भी जनधन की हानि होती है नगर की दर्जनों कालोनियों के निवासियों की बेचैनी बढ़ जाती है। क्योंकि यहां गंगा विहार व्रज विहार जीतपुर मलिक नगर शिवम विहार शंकर विहार राधेश्याम विहार आदि कालोनियों में बड़ी संख्या में लाइनों के नीचे मकान बने हुए हैं। कुछ लोगों ने आर्थिक तंगी के कारण प्रॉपर्टी डीलरों से लाइनों के नीचे सस्ते प्लॉट लेकर उनमें अपने आशियाने बनाए हुए हैं। कुछ कालोनियों में विद्युत विभाग ने जबरन मकानों के ऊपर बिजली की लाइनों का जाल बिछा दिया। कालोनियों मैं लाइने जर्जर हो टूटती रहती हैं जिससे विद्युत आपूर्ति तो बाधित होती ही है। अनगिनत हादसे भी हो चुके हैं जिनमें दर्जनों लोगों की जाने अकाल काल के गाल में समा गई। 
नियमानुसार हाईटेंशन लाइनों के नीचे निर्माण नहीं होना चाहिए यह नियम कहने भर के लिए है ऐसे स्थानों पर जब लोग निर्माण कार्य कराते हैं। उस समय विद्युत विभाग नियमों का पालन कराने का प्रयास नहीं करता और रोकथाम करे भी कैसे लोगों के भारी विरोध के बावजूद विभाग ने कई कॉलोनियों के सैकड़ों मकानों के ऊपर से उच्च क्षमता वाली लाइने खींच दी। उस समय पुलिस तैनात कर लाइने मकानों के ऊपर से निकाली गई। रावली रोड पर एक मकान की छत पर बैठी महिलाओं युवतियों को चपेट में ले लिया था। जिसमें कई मौतें हुई थी जीतपुर में ही 3 मौत अलग-अलग स्थानों पर लाइनों के कारण हो गई थी। 
प्रीत विहार कॉलोनी में घर की छत पर गया बच्चा झुलस गया जिसकी इलाज के दौरान मृत्यु हो गई थी। इसके अलावा अन्य कई हादसे ऐसे हो चुके हैं कि लोग उन्हें भुलाने की कोशिश के बावजूद भूल नहीं पाते क्योंकि किसी के अंग भंग हो गए कितनी ही जाने चली गई। लोग इस बारे में अधिकारियों से अनेकों बार लाइन बदलने की मांग कर चुके हैं लेकिन किसी के कान पर जूं नहीं रेंगी और लोगों की जाने जा रही हैं। घायल हो मरणासन्न हालत में पहुंच रहे हैं। इस बारे में सभासद मनोज चौधरी उर्फ टिंकल ने बताया कि इस बारे में कई बार उच्चाधिकारियों को पत्र लिखे जा चुके हैं लेकिन अधिकारी इस और ध्यान नहीं दे रहे। यहां के लोगों के लिए बिजली की लाइनें अभिशाप बन गई हैं।
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