एक आशियाना भी हो अपना बना अधूरा सपना, बैंक नहीं करा रहे होम लोन,

एक आशियाना भी हो अपना बना अधूरा सपना, बैंक नहीं करा रहे होम लोन,





मुरादनगर। क्षेत्र में जमीनों के रेट तेजी से बढ़ रहे हैं मध्यम वर्गीय परिवार यहां आशियानों की तलाश कर रहे हैं लेकिन बैंकों की नीतियों के कारण वह लोग निराश हैं। जिनके पास एक अपना घर खरीदने के लिए इकट्ठा रुपया नहीं है और बैंक ऋण से अपने सपनों को साकार कर अपने परिवार के लिए एक छत चाहते हैं। जबकि बड़े शहरों में हाउसिंग लोन आसानी से मिल जाते हैं यहां के बैंकों ने इस क्षेत्र को नेगेटिव माना हुआ है, इसलिए बैंक हाउसिंग लोन देने से मना कर देते हैं। कुछ निजी बैंक जो कि मेरठ गाजियाबाद नोएडा के यहां हाउसिंग लोन उपलब्ध करा देते हैं लेकिन उनका लिया हुआ कर्ज बहुत महंगा पड़ता है। उन बैंक से लोन लेने के लिए एजेंटों से संपर्क करना पड़ता है। वह लोन कराने के लिए फाइल चार्ज के साथ ही कमीशन भी लेते हैं जो कर्ज की रकम का 10% तक होता है। हजारों रुपए फाइल चार्ज के नाम पर ऋण की स्वीकृति मिलने से पहले ही वसूल लेते हैं, और उन बैंकों का ब्याज भी सरकारी बैंकों से कई गुना ज्यादा होता है। नौकरी छोटा व्यापार करने वाले के पास एक दम इतना रुपया नहीं होता कि वह मुरादनगर जैसे क्षेत्र में अब प्लाट खरीदकर मकान बना सके। ऐसे बहुत से लोग यहां अपनी दुनिया बसाना चाहते हैं क्योंकि अभी यहां पर्यावरण ज्यादा दूषित नहीं हुआ। ईस्टर्न परिसर एक्सप्रेस वे चालू है जिससे हरियाणा दिल्ली आदि जाने के लिए बिना जाम कम दूरी से सफर हो जाता है। दिल्ली मेरठ रीजनल रेल का कार्य प्रगति पर है उस की सुविधा भी आने वाले वर्षों में उपलब्ध हो जाएगी। यहां से हजारों लोग प्रतिदिन नौकरी व्यापार के लिए सफर करते हैं उनके लिए रास्ता आसान हो जाएगा सरकार गंग नहर किनारे उत्तराखंड की और हाईवे का निर्माण कर रही है, जिससे मुरादनगर एक महत्वपूर्ण स्थान बन रहा है। दिल्ली हरियाणा नोएडा उत्तराखंड से यहां आना जाना काफी आसान सुविधाजनक हो जाएगा। इसलिए लोग चाहते हैं यहां एक घरौंदा लेकिन बढ़ते जमीन के भाव तथा बैंकों के द्वारा ऋण स्वीकृति न देने के कारण बहुत से लोगों के सपने अधर में हैं। इस बारे में भारतीय स्टेट बैंक आयुध निर्माण के शाखा प्रबंधक अमर श्रीवास्तव ने बताया कि कुछ कारण होते हैं जिनकी वजह से कुछ स्थानों पर हाउसिंग लोन स्वीकृत नहीं होते हैं।
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