सभी को खुश नहीं किया जा सकता - विनोद जिंदल

सभी को खुश नहीं किया जा सकता - विनोद जिंदल


मुरादनगर। सभी को कभी संतुष्टि नहीं होती मनुष्य के कष्टों का कारण ही असंतुष्टि है। यह कहना है समाजसेवी शिक्षाविद विनोद जिंदल का। एक भेंट में उन्होंने कहा कि अपने विचार का मूल मन्त्र क्या होता है। शायद हमें ये नहीं पता हो पर इतना अवश्य जान लेना चाहिए कि सभी को खुश करने का प्रयास करना ही हमारी असफलताओं का मूल मन्त्र है। यह सर्वमान्य सत्य है कि हम कभी भी अपने लाख प्रयासों चेष्टाओं व सावधानियों के बाद भी एक साथ सभी को प्रसन्न नही कर सकते। जिंदल ने कहा कि यदि हमारा एक कार्य किसी एक व्यक्ति या समूह विशेष का हित

साध कर उसको प्रसन्न करता है या लाभ पहुंचाता है वहीं उससे किसी अन्य को कष्ट व हानि की सम्भावना भी हो सकती है। अतः हमे प्रशंसा के साथ ही आलोचना के लिए भी तैयार रहना चाहिए। यदि हम अपनी आलोचना के डर से सब को एक साथ प्रसन्न करने हेतु नियोजित कार्य करना चाहेंगे तो संभवतः हम कोई ठोस निर्णय ले ही नही पाएंगे और अनिर्णय व अकर्मण्यता की स्थिति के शिकार हो जायेंगे जो हमारे प्रयासों को सिर्फ विफलता के मार्ग की तरफ

ले जायेगा। जो मनुष्य पहले निश्चय करके फिर कार्य का आरंभ करता है। कार्य के बीच में नहीं रूकता समय को व्यर्थ नहीं जाने देता और चित्त को वश में रखते हुए अपने उद्देश्य से नहीं डिगता ऐसे मनुष्य के सफल होने में नाममात्र भी संदेह नहीं रहता। उन्होंने कहा कि अपने बच्चों को ऐसी शिक्षाएं प्राथमिकता से दिलवाए।


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