चेयरमैन सईउल्लाह खान ने कहा था न खाऊंगा न खाने दूंगा

चेयरमैन सईउल्लाह खान ने कहा था न खाऊंगा न खाने दूंगा


मुरादनगर। व्यापारी से नगर पालिका अध्यक्ष  सईदुल्लाह खान बने, इस बार तीनों मित्र चेयरमैन पद के लिए मैदान में थे। लोग बताते हैं कि दामोदर दास अग्रवाल, जयप्रकाश अरोड़ा डेरी वाले और सईदुल्लाह खान आपस में मित्र भी थे। घरेलू संबंध थे। उस समय मुस्लिम मतदाताओं का तो ध्रुवीकरण हुआ ही, व्यापारिक साफ छवि के कारण उन्हें मुस्लिमों के साथ समाज के हर वर्ग से वोट मिला था।
पहली बोर्ड बैठक में कुछ विकास कार्य पास किए गए। महीनों तक उन कार्यों के प्रारंभ न होने पर एक दिन अधिकांश सभासद पालिका कार्यालय पहुंचे।और पालिका अध्यक्ष से कार्यों के बारे में पूछा जिस पर उन्होंने प्रमुख लिपिक को सभासदों के सामने ही बुलाकर कार्यों के बारे में पूछा। लिपिक ने बताया कि फाइल चली गई है कुछ खर्चा जाना है, इसी पर वह भड़क गए और कहा कि मैं किसी को रुपए दूंगा और न लूंगा, फिर किसी तरह कार्यों की फाइल पास हो पाई। 
नर्क में तब्दील हो गई ईदगाह बस्ती की ओर ध्यान प्राथमिकता से दिया, जिसके कारण वहां के निवासियों को बहुत लाभ हुआ। इसके अलावा सभासदों द्वारा सुझाए गए। सभी कार्यों को कराने का वह प्रयास करते थे। यदि किसी को उनसे मिलना होता था वह अधिकांश समय रावली रोड की कोठी पर मिलते थे। वहां न होने पर लोग घर भी पहुंच जाते थे। खाने खिलाने के शौकीन थे। व्यापार ठेकेदारी से एकदम चेयरमैन बन जाने के बाद भी वह राजनीति में परिपक्व नहीं हुए थे। उनके कार्यकाल में समितियों का गठन होना था। 
सभी सभासद गठन की मांग पर अड़ गए लेकिन उन्होंने स्पष्ट रूप से कह दिया था कि किसी कार्य समिति का गठन नहीं होगा लेकिन बाद में गुस्सा शांत हो जाने पर उन समितियों का गठन हुआ। नगर पालिका सीमा में चल रहे निर्माण विकास कार्यों पर वह निगरानी रखते थे। कभी-कभी तो मित्र मंडली को लस्सी, चाय, पिलाने के बहाने कार्यों की गुणवत्ता परखने के लिए ले जाते थे। 
उस समय शायद गरीबों को मकान बनाने के लिए सहायता का प्रावधान नहीं था लेकिन उन्होंने दर्जनों परिवारों को अपने संसाधनों से आवास बनाने में काफी सहायता कर कई परिवारों को छत मुहैया कराई थी। उनसे शहर को बहुत ज्यादा उम्मीदें थीं लेकिन अचानक बीमार हुए और कुछ दिनों में ही उनका निधन हो गया। जिसके कारण उनके कुछ कार्य अधूरे रह गए। उनके पुत्र समीउल्लाह खान ने बताया कि वह अभी व्यापार संभाल रहे हैं। इसलिए राजनीति के बारे में सोचा ही नहीं है।

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